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टमाटर के दाम हुए 50 पैसे किलो, किसानों ने सड़कों पर फेंक जताया गुस्सा – देखें वीडियो

मोदी और सोनिया के भाषणों में दखल रखने वाला, आज आ गया सड़क पर- देखें वीडियो

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टमाटर के दाम हुए 50 पैसे किलो, किसानो ने सड़कों पर फेंक जताया गुस्सा

टमाटर के दाम हुए 50 पैसे किलो, किसानो ने सड़कों पर फेंक जताया गुस्सा

जबलपुर। देश में दो ही सब्जियां ऐसी हैं, जिन्होंने न केवल राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई, बल्कि सरकारें गिराने तक का काम कर डाला। लेकिन समय की मार है कि ये दोनों अब सड़कों पर आ गई हैं। हम बात कर रहे हैं प्याज और टमाटर की। प्याज जहां आज अपना दाम १० रुपए तक बचाए हुए है, वहीं टमाटर एक रुपए से भी आधे यानि कि ५० पैसे प्रति किलो पर आ गया है। ऐसे में यदि किसी को नुकसान हुआ है तो वह किसान है। जिसे लागत भी नहीं मिल रही है। ऐसे में भाव न मिलने से उनका गुस्सा चरम पर आ गया है। गाडरवारा में किसानों ने आंदोलित होकर सड़कों पर टमाटर फेंक रहे।

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सड़क पर फेंक दिया हजारों किलो टमाटर

गाडरवारा कभी अमीरों की थाली की शोभा बढ़ाने वाला टमाटर आज मिट्टी से भी कम मूल्य पर बिक रहा है। बताया जाता है कि कुछ दिनों से थोक सब्जी मंडी में टमाटर के दाम 50 पैसे से एक रुपए प्रति किलो के आसपास चल रहे हैं। जिससे किसानों की उत्पादन एवं थोक व्यापारियों की खरीदी लागत भी नहीं निकल रही। जिस का विरोध शुक्रवार को स्थानीय थोक सब्जी मंडी में किसानों ने टमाटर फेंककर विरोध जताया। उनका कहना है कि टमाटर के दाम जमीन पर आने से टमाटर घाटे का सौदा बन गया है। टमाटर उत्पादक किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे। उन्हें फसल लगाने एवं बेचने पर घाटा हो रहा है। जिससे मजबूरन टमाटर फेंकने पड़़ रहे हैं। उन्होंने शासन से लागत के अनुरूप टमाटर के दाम दिलाए जाने की अपेक्षा जताई है। ताकि उन्हें टमाटर में नुकसान न झेलना पड़े। इस मौके पर अनेक किसान एवं सब्जी विक्रेता मौजूद रहे। फेंके गए टमाटरों को मवेशी खाते रहे।

गाडरवारा थोक सब्जी विक्रेता बबलू कुशवाहा ने बताया कि टमाटर का उत्पादन औसत से अधिक हो गया है वर्तमान में मंडी में प्रतिदिन 10 गाड़ी एवं अधिक माल की आवक हो रही है केवल गाडरवारा ही नहीं कहीं भी टमाटर के अधिक दाम एवं मांग नहीं है उन्होंने बताया कि गत वर्ष टमाटर महंगा बिकने से जो किसान 2 एकड़ में टमाटर लगाते थे उन्होंने 10- 15 एकड़ में टमाटर को दिया जिससे उत्पादन काफी बढ़ गया आवक अधिक होने से दाम नीचे गिर गए साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि सब्जी के रेट पूर्व निर्धारित नहीं होते बल्कि रोज बोली लगाकर सब्जी खरीदी जाती है टमाटर के दाम कम होने के पीछे उन्होंने बिचौलियों एवं दलालों की भूमिका को नकारा है उनके अनुसार केवल उत्पादन अधिक होने से दाम गिरे हैं

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