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बाढ़ से गांव में सबसे बड़ी त्रासदी! भूख से बिलख रहे ग्रामीण, बोले- राशन कुछ को मिला तो कइयों को नहीं

Bastar Flood: ग्रामीणों ने पत्रिका को बताया कि बुधवार को जब गांव में पानी पूरी तरह से उतरा तो सांसद और जिला प्रशासन के अफसर गांव पहुंचे। वे अपने साथ कुछ राशन व अन्य सामान लाए थे।

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मांदर में तो बच्चे अब भी भूख से बिलख रहे (Photo source- Patrika)

मांदर में तो बच्चे अब भी भूख से बिलख रहे (Photo source- Patrika)

Bastar Flood: बस्तर जिले के मांदर गांव में इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदी आई है। गांव सोमवार और मंगलवार को आए बाढ़ की वजह से पूरी तरह से खत्म हो चुका है। पत्रिका की टीम लगातार दूसरे दिन गांव पहुंची और वहां का हाल जाना। गुरुवार को ग्रामीणों ने पत्रिका को बताया कि गांव में मासूम बच्चे भूखे हैं। प्रशासन ने चावल-दाल और कंबल भेजा था लेकिन कुछ को मिला और कइयों को अब भी मदद नहीं मिली है।

Bastar Flood: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से की बातचीत

आसपास के गांव से उधार में राशन लाकर ग्रामीण एक वक्त का खाना खा पा रहे हैं। गांव की दुकानें भी बाढ़ में डूब गई थीं इसलिए वहां भी सामान नहीं मिल रहा। ग्रामीणों के पास राशन खरीदने के लिए पैसे भी नहीं हैं क्योंकि वह भी बाढ़ में बह गया। पहनने के लिए कपड़े नहीं बचे हैं। मवेशी, राशन और पैसे सब कुछ बाढ़ के पानी के साथ बह गए।

इधर, गुरुवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जब बस्तर संभाग के बस्तर, सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के कलेक्टरों से बात की तो। बस्तर के कलेक्टर ने कहा कि बस्तर जिले के हर प्रभावित गांव में हर किसी तक मदद पहुंचा दी गई है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन ने मांदर गांव के सरपंच के घर पर राशन छोड़ दिया था। वहां से कुछ को राशन मिला तो कइयों को अब भी नहीं मिल पाया है।

मासूम दूधमुंहे बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा। उनकी माएं भी भूखी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हमारा सब कुछ खत्म हो चुका है। हमें तत्काल बड़ी राहत दी जाए। पानी उतरने के साथ मांदर गांव में हर तरफ इस तरह से बर्बादी का मंजर नजर आ रहा है।

राशन कहां छोड़ा, कितना बंटा, कोई मॉनिटरिंग नहीं

ग्रामीणों ने पत्रिका को बताया कि बुधवार को जब गांव में पानी पूरी तरह से उतरा तो सांसद और जिला प्रशासन के अफसर गांव पहुंचे। वे अपने साथ कुछ राशन व अन्य सामान लाए थे। गांव के सरपंच से कहा गया कि सभी में इसे बांट दे लेकिन यह कहने के बाद राहत से संबंधित कोई मॉनिटरिंग नहीं की गई। गांव तक फिर अगले दिन कोई प्रशासनिक अफसर नहीं आया। किसी ने यह नहीं देखा कि सभी को राशन मिला है या नहीं।

हमें जिम्मेदारों ने भूलाया… बच्चे भूखे हैं

मांदर की एक ग्रामीण महिला रोते हुए बताती है कि हमारे छोटे-छोटे बच्चे भूखे हैं, घर बाढ़ में गिर गया। अब कहां जाएं, किससे मदद मांगें। किसी ने हमारी सुध नहीं ली। वहीं एक बुजुर्ग कहते हैं कि इतनी बड़ी मुसीबत आई है, लेकिन जिम्मेदारों ने हमें भूला दिया है। हम कब तक ऐसे ही तड़पते रहेंगे। ग्रामवासियों की स्थिति देखकर साफ लगता है कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवीय पीड़ा की चरम अवस्था है।

मासूमों को लेकर सुरक्षित जगह की तलाश

Bastar Flood: लोहांडीगुड़ा ब्लॉक मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर बसे मांदर ग्राम में बीते दो दिनों से हुई तेज बारिश ने कहर बरपा दिया है। गांव की गलियां, घर और आंगन सब पानी में डूब चुके हैं। बाढ़ का पानी गांव में ऐसा घुसा है मानो पूरा जीवन बहा ले जाने आया हो। गांव के लोग अपने बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित जगह ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चारों ओर सिर्फ पानी और तबाही का मंजर है।

मिट्टी के घर ढह गए, खाने-पीने का सामान बाढ़ में बह गया। कई परिवार खुले आसमान के नीचे बिना भोजन और पीने के स्वच्छ पानी के गुज़ारा कर रहे हैं। महिलाओं की आंखों में आंसू और बच्चों की मासूमियत इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक दृश्य पेश कर रही है।

ग्रामीणों ने फिर दोहराई शिफ्टिंग की मांग

मांदर गांव में हर साल बाढ़ की स्थिति बनती है। इस बार जैसी बाढ़ आई है उसकी वजह से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। गांव के कई घर जमींदोज हो चुके हैं। ग्रामीणों ने एक बार फिर कहा कि बार-बार बाढ़ की स्थिति यहां बनती है और हमें लाखों का नुकसान होता है। ऐसे में हमें यहां से शिफ्ट किया जाए और सुरक्षित जगह पर जमीन के साथ मकान दें।