
CG News: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के सुकमा में सुरक्षा बलों पर 2018 में 15 निर्दोष आदिवासियों की हत्या का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई जुलाई तक स्थगित कर दी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की अदालत में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि याचिका में झूठे दावे किए गए हैं, गलत तस्वीरें दी गई हैं।
इस पर बेंच ने टिप्पणी की कि छत्तीसगढ़ में शांति प्रक्रिया चल रही है। आज खबर है कि 26 लोगों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। अनावश्यक रूप से इस तरह के मुकदमे इस प्रक्रिया में आड़े आएंगे, यदि इलाके में शांति वापस आ रही है, तो हम अनावश्यक रूप से ऐसी चीजें क्यों करें।
बता दें कि एसजी ने प्रस्तुत किया कि यह 'झूठे' बयानों का मामला था और उन व्यक्तियों को पैसे का भुगतान किया गया था जिन्होंने विषय बयान दिए थे (याचिकाकर्ता द्वारा भरोसा)। उन्होंने आगे बताया कि अधिकारियों द्वारा एक आवेदन दायर किया गया है जिसमें वर्तमान मुकदमे के स्रोत का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
वहीं एसजी ने दावा किया कि सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने के लिए तेलंगाना स्थित एक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने आगे बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा अपने मामले के समर्थन में उड़ीसा और महाराष्ट्र में घटनाओं की तस्वीरें दायर की गई थीं। जब इस पर आपत्ति जताई गई। तभी याचिकाकर्ता ने माफी मांगी और गलती स्वीकार की।
CG News: पिछले चार दशक से लाल आतंक से जूझ रहे राजनांदगांव सहित अविभाजित जिले खैरागढ़-छुईखदान-गंडई व कवर्धा अब नक्सल प्रभावित जिले से बाहर आकर लीगेसी श्रेणी में आ गया है। तीनों जिले को केन्द्र सरकार द्वारा लीगेसी व थर्ड डिस्ट्रिक्ट की श्रेणी में शामिल किया गया है। यानी ये वैसे जिले हैं, जो अब नक्सलियों के प्रभाव में नहीं रहे, लेकिन यहां दुबारा नक्सली नहीं पनपने का सुरक्षा इंतजाम रखना होगा।
Published on:
09 Apr 2025 08:21 am
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