
CG News: बस्तर में रेल सेवा प्रभावित होने के पीछे इस रूट की भौगोलिक स्थिति भी है। यहां के घुमावदार और पहाड़ी रास्तों की वजह से हमेशा लैंडस्लाइडिंग की स्थिति बनी रहती है। अच्छी बात यह है कि अब तक इससे जान माल का नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन हां इसका खतरा हमेशा बना रहता है।
पिछले साल मनाबार-जराती स्टेशन के बीच भी लैंडस्लाइडिंग हुई थी। इसके चलते करीब एक महीने तक यात्री ट्रेनें प्रभावित रहीं। ऐसे में इस जगह पर भूस्खलन से मलबा रेलवे ट्रेक पर न आ सके इसके लिए रिर्टनिंग वॉल तैयार की जा रही है। इसका काम भी करीब 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इसके बन जाने से उम्मीद लगाई जा रही है कि रूट में यात्री ट्रेनें लैंडस्लाइड के बाद भी प्रभावित नहीं होगी।
किरंदूल-कोत्तावलसा रेल लाइन रूट में मनाबार और जराती के बीच दो महीने पहले लैंडस्लाइड हुई थी। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना के दो महीने तक ट्रेन शुरू नहीं हो पाई थी। (Chhattisgarh News) इसके बाद भी जब ट्रेन का संचालन किया जा रहा था तो यहां ट्रेन की गति धीमी कर दी जा रही थी। ऐसा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। ताकि किसी तरह का मलबा लैंडस्लाइड के बार ट्रेक पर न आ जाए।
CG News: रेलवे के मुताबिक इस रूट में सबसे अधिक गंभीर स्थिति मौजूदा समय में मनाबार और जराती स्टेशन के बीच ही है। यहां की एक पहाड़ी में लैंडस्लाइड की वजह से बड़ी मात्रा में मलबा ट्रेक पर था। मलबा हटाने के दौरान लगातार लैंड स्लाइड होती रही।
यही वजह है कि रेलवे इसे अभी सबसे खतरनाक स्थिति में मान रहा है। यही वजह है कि अब यहां रिटर्निंग वॉल तैयार की जा रही है। जिससे की लैंडस्लाइड होने पर मलबा टेे्रक पर न आ पाए। रेलवे का कहना है कि यह काम एक महीने के अंदर पूरा हो जाएगा। ट्रैक के करीब रिटर्निंग वॉल बनाने का काम तेजी से चल रहा।
Published on:
21 Dec 2024 12:59 pm
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