
नक्सली पीस टॉक पर असमंजस (Photo source- Patrika)
Naxalite Peace Talk: नक्सलियों के पीस टॉक के प्रस्ताव को लेकर सरकार किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं दिखा रही है और हर कदम सोच-समझकर उठा रही है। प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि सरकार ने नक्सलियों के पत्र और ऑडियो की सत्यता की जांच करवाई है। ऑडियो के परीक्षण के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि वह आवाज नक्सली प्रवक्ता अभय उर्फ सोनू की है, जो पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं।
पत्र और ऑडियो दोनों के कंटेंट एक समान होने से उनकी विश्वसनीयता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि अब भी कुछ बातें और स्पष्ट होनी बाकी हैं। दूसरी ओर, पीस टॉक का पत्र वायरल होने के एक सप्ताह के भीतर ही नक्सल संगठन में अंतर्द्वंद्व सामने आ गया है। नक्सलियों की तेलंगाना स्टेट कमेटी ने एक बयान जारी कर सोनू के प्रस्ताव को निजी विचार बताते हुए इसे भ्रमित करने वाला करार दिया है।
स्टेट कमेटी के प्रवक्ता जगन ने तेलुगु में दिए बयान में भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है। पीस टॉक को लेकर भी पूरी जानकारी दिल्ली को दी गई है। केंद्र और एजेंसियां भी इस विषय पर मंथन कर रही हैं।
नक्सलियों द्वारा लंबे समय से संवाद की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन हालिया मतभेदों के चलते संगठन के साझा प्रयासों को झटका लगा है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जब तक नक्सल संगठन एकमत नहीं होते, वार्ता किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकती।
साथ ही, आंध्रप्रदेश में 2004 में वार्ता के विफल अनुभवों से सरकार और भी सतर्क होकर आगे बढ़ रही है, क्योंकि इससे पहले कई बार हथियारबंद संगठन अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए सरकार को भ्रमित करते रहे हैं, इसलिए उस वार्ता के दस्तावेज भी मंगाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के भीतर भी इस वार्ता को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ वार्ता के पक्षधर हैं, तो कुछ को नक्सलियों की बात पर भरोसा करने के पक्ष में नहीं है, वहीं कुछ बैक डोर टॉक पर जोर दे रहे हैं। उधर, वार्ता पर नक्सली संगठन में विरोध के सुर केंद्र सरकार की एजेंसियां भी परीक्षण कर रही है।
Naxalite Peace Talk: सरकार वार्ता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है और अभी किसी स्पष्ट घोषणा की जगह ‘बैक डोर’ चैनल के माध्यम से संवाद की रणनीति पर काम कर रही है। फिलहाल खुफिया एजेंसियां और कुछ सामाजिक मध्यस्थ लगातार जमीनी फीडबैक ले रहे हैं और बातचीत के माहौल को समझने का प्रयास कर रहे हैं।
शांति वार्ता की चर्चा होते ही नक्सली संगठनों के भीतर मतभेद सतह पर आ गए हैं। तेलंगाना इकाई ने इस पहल को संगठन के आदर्श और सिद्धांतों के खिलाफ मानते हुए कहा है कि सरकार की मंशा सिर्फ आंदोलन को कमजोर करने और संगठनों में फूट डालने की है, न कि समस्या का वास्तविक समाधान। इसी वजह से तेलंगाना इकाई ने वार्ता का खुलकर विरोध किया है।
Updated on:
21 Sept 2025 12:56 pm
Published on:
21 Sept 2025 12:55 pm
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