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CG News: छत्तीसगढ़ के इस सरकारी स्कूल में अब तक नहीं बना रसोई घर, तिरपाल ढंककर मध्याह्न भोजन पकाने को मजबूर

CG News: शासकीय प्राथमिक स्कूल संचालित है, जहां 100 से अधिक छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या है। छात्र-छात्राओं को शासन की योजना के तहत मध्याह्न भोजन परोसा जाता है

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CG News: छत्तीसगढ़ के इस सरकारी स्कूल में अब तक नहीं बना रसोई घर, तिरपाल ढंककर मध्याह्न भोजन पकाने को मजबूर

CG News: लोग अपने घरों में रसोई को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन जिले के स्कूलों में रसोई को लेकर विभाग सजग नहीं है। यही कारण है कि आज भी जिले के कई स्कूलों में किचनशेड का निर्माण नहीं हो पाया है। इसके चलते कई स्कूल में बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे भोजन पकाना पड़ रहा है।

राम्हेपुर कला में शासकीय प्राथमिक स्कूल संचालित है, जहां 100 से अधिक छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या है। छात्र-छात्राओं को शासन की योजना के तहत मध्याह्न भोजन परोसा जाता है, लेकिन रसोई कक्ष के अभाव में खुले आसमान के नीचे। इसके चलते रसोईया को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश ने मुश्किलें और भी बढ़ा दी है। मध्याह्न भोजन कक्ष के अभाव में रसोईया बच्चों के लिए खाना खुले आसमान के नीचे पका रही है।

तिरपाल और पॉलिथीन के सहारे के जरिए बमुश्किल बारिश के बीच भोजन पकाया पाता है। मध्याह्न भोजन कक्ष के अभाव में रसोईयों के पास दूसरा कोई विकल्प ही नहीं है। ऐसे में खुले या फिर वैकल्पिक व्यवस्था के आधार पर कराए जा रहे मध्याह्न भोजन के कारण अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

स्वीकृति के बाद भी निर्माण नहीं

राम्हेपुर कला में शासकीय प्राथमिक स्कूल में किचन शेड निर्माण के लिए प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई, इसके बाद भी शेड तैयार नहीं हो सका है। वहीं इस पर अधिकारियों भी ध्यान इस ओर नहीं है। भोजन बनाने वाली महिला ने बताया कि बरसात का मौसम, ठण्ड हो या गर्मी। सभी मौसम में खुले आसमान के चीचे मध्याह्न भोजन बनाने को मजबूर है। शासकीय प्राथमिक शाला राम्हेपुरकला में छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग 100 से अधिक है। बावजूद रसोई कक्ष निर्माण के लिए ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

इस ओर शासन प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है। रसोई कक्ष का निर्माण हो जाता तो भोजन पकाने में रसोइयों को राहत मिलता और मध्याह्न भोजन सुरक्षित रहता। किचन शेड नहीं होने के कारण खाना बनाने का सामान हर दिन इधर-उधर रखना पड़ता है। किचन शेड को लेकर समूह की महिलाएं कई बार मांग कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं किया गया है।