
विकास का मास्टर प्लान लागू (photo source- Patrika)
Naxal Free Bastar: नक्सल मुक्त हो चुके बस्तर को बदलने का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है। संभाग के सभी जिलों में अब प्रभावित रहे इलाकों के विकास की शुरुआत हो रही है। ऐसे गांव जहां ग्रामीण वंचित और पीडि़त ही रहे वहां अब कलेक्टर-एसपी चौपाल रहे हैं। बस्तर जिले में भी ऐसे कई गांव हैं जो सालों तक नक्सलवाद का दंश झेलते रहे, ऐसे गांवों में लगातार बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा अपनी टीम के साथ पहुंच रहे हैं।
गुरुवार को कलेक्टर-एसपी ने दल-बल के साथ जिले के अंतिम छोर पर बसे पावेल और मालेवाही गांव पहुंचकर नया रेकॉर्ड बना दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि पावेल और इससे लगे 12 गांव भौगोलिक रूप से अबूझमाड़ का हिस्सा हैं और इन गांवों तक कभी कोई कलेक्टर या एसपी स्तर का अधिकारी नहीं पहुंचा था। प्रशासन के तमाम आला अधिकारी गुरुवार सुबह जगदलपुर से निकले और दंतेवाड़ा जिले के सातधार पुल को पार करते हुए अबूझमाड़ में दााखिल हुए। सातधार पुल से 15 किमी दूर घने जंगलों और पहाडिय़ों के बीच बसे पावेल गांव में कलेक्टर ने चौपाल लगाई।
ऐसा पहली बार हुआ जब पावेल और मालेवाही जैसे दूरस्थ गांव के लोगों की कोई कलेक्टर सुन रहा था। कलेक्टर ढाई घंटे तक पावेल में ग्रामीणों के बीच बैठे रहे और एक-एक कर उनकी समस्या और मांग सुनते रहे। कलेक्टर और एसपी शलभ सिन्हा ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए उनका भरोसा तो जीता ही साथ ही उन्हें हर तरह की योजनाओं की जानकारी भी दी। गांवों की प्रमुख समस्याओं को दूर करने का आदेश भी चौपाल से ही जारी कर दिया गया। इस दौरान एसपी बस्तर शलभ सिन्हा ने ग्रामीणों से कहा कि पुलिस हमेशा आपके लिए तत्पर है। ग्रामीणों युवाओं को पुलिस में भर्ती के लिए भी तैयार करेंगे।
चौपाल के दौरान कलेक्टर ने सबसे पहले ग्रामीणों को हर तरह की योजनाओं की जानकारी दी। इसके बाद उनसे यह भी पूछा कि अभी क्या कुछ उन्हें मिल रहा है। इस अवसर पर अधिकारियों ने 56 नए राशन कार्ड, आधार कार्ड और वन अधिकार मान्यता पत्र का वितरण किया। साथ ही बच्चों को चॉकलेट, बिस्किट, टिफिन बॉक्स और पानी की बोतल वितरित की। कलेक्टर ने आगामी तीन माह के राशन की व्यवस्था गांव में करवाने के निर्देश दिए। आगामी दिनों में राशन सामग्री वितरण के लिए शासकीय राशन दुकान हेतु भवन निर्माण की स्वीकृति दी ताकि उसी से हितग्राहियों को गाँव में राशन सामग्री उपलब्ध हो।
प्रशासन जिस इलाके में पहली बार पहुंचा वहां बस्तर जिले से सीधे पहुंच ही नहीं सकते। भगौलिक रूप से यह इलाका बेहद चुनौतीपूर्ण हमेशा से रहा है। इसी वजह से नक्सलियों को यहां सफलता मिलती रही और यह क्षेत्र उनका सुरक्षित बेस आखिर तक बना रहा। सातधार पुल के बाद मालेवाली से लगे हर्राकोडेर, पिच्ची कोडेर, बोदली, हितेमेटा जैसे गांव आते हैं। कुल 12 गांव हैं जहां ङ्क्षहसा के दौर में सिर्फ जनताना सरकार चलती थी।
कलेक्टर गुरुवार को जिन इलाकों से गुजरे और जहां पहुंचे वहां हमेशा नक्सली फ्रंट पर रहे। सभी 12 गांव में हमेशा नक्सली फ्रंट पर रहे। फोर्स को यहां कभी बड़ी सफलता नहीं मिली। दो साल पहले जब बोदली में कैंप खुला तो हालात कुछ सामान्य हुए पर दहशत अंत तक बनी ही रही। इन इलाकों में विकास लगभग शून्य है और कलेक्टर के दौरे के बाद उम्मीद की जा रही है सड$क, पुल-पुलिया के साथ ही हर तरह की बुनियादी सुविधाएं अब तेजी से पहुंचेंगी।
मालेवाली से आगे हर्राकोडेर की पहाड़ियों पर स्थित बिजली कंपनी के एक बड़े और प्रमुख टावर को नक्सलियों ने 2007 में ब्लास्ट कर उड़ा दिया था। इसके बाद बस्तर में 11 दिन तक ब्लैक आउट रहा था। आम लोग इस वजह से बुरी तरह प्रभावित हुए थे और बस्तर लगभग थम सा गया था। बस्तर के लोग आज भी ब्लैक आउट के दौर को याद कर सिहर जाते हैं, लेकिन अब बस्तर के हर प्रभावित इलाके बदलाव का केंद्र बन रहे हैं।
पावेल में जिस जगह पर कलेक्टर-एसपी व अन्य अधिकारी चौपाल में बैठे वह जगह खास थी। गांव के चयन से पहले ही यह तय किया गया था कि कलेक्टर कहां चौपाल लगाएंगे। ऐसे में यह तय हुआ कि सभी अफसर उसी जगह पर बैठेंगे जहां 20 साल पहले नक्सलियों ने फारेस्ट बिल्डिंग को जमींदोज कर दिया था। मौके पर आज भी बिल्डिंग का मलबा दिखता है। उस वक्त पूरे इलाके में सिर्फ और सिर्फ नक्सलियों की चलती थी। इस इलाके में नक्सली अपने ट्रेनिंग कैंप भी चलाते थे।
Updated on:
17 Apr 2026 11:50 am
Published on:
17 Apr 2026 11:48 am
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