Jagdalpur News: मस्तमौला जीवन जीने के लिए पहचाने जाने वाले बस्तरिया अब अवसाद के शिकार हो रहे हैं।
जगदलपुर। Chhattisgarh News: मस्तमौला जीवन जीने के लिए पहचाने जाने वाले बस्तरिया अब अवसाद के शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर इसके पीछे का कारण उनकी तेजी से बदल रही जीवनशैली को बता रहे हैं। यही वजह है कि अब बस्तर में डिप्रेशन, अल्जाइमर और अवसाद जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इस बात की जानकारी हाल ही में आदिवासी इलाके में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण का शिविर लगाने के बाद हुई। इसमें 350 से अधिक मरीज इसी बीमारी के मिले हैं।
सीएमएचओ आरके चतुर्वेदी ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने को गांवों में भी मानसिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किये जा रहे है। इसका परिणाम भी अब दिखने लगा है, सुदूर अंचल में रहने वाले ग्रामीण अब इस बीमारी को समझकर अपना और अपने करीबियों का इलाज करवाने आ रहे है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नेगानार समेत अन्य इलाके में मेंटल हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया।
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषभ साव ने बताया कि ग्रामीण परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य की जागरूकता के लिये लगने वाले शिविर से अब मानसिक रोगियों को शंका की दृष्टि से नहीं देखा जाता है। इसके अलावा ग्रामीण ये मानने लगे हैं कि मानसिक विकार कोई भूत-प्रेत का प्रकोप नहीं बल्कि एक बीमारी है, जिसका इलाज सम्भव है। इसी जागरूकता को आगे बढ़ाने ग्रामीण इलाकों तक जिला मानसिक स्वास्थ्य की टीम अपना शिविर आयोजित कर पीडि़त लोगों का नि:शुल्क इलाज कर रहे हैं।
हाटबाजार में किया जा रहा जागरूक
ग्राम नेगानार में शिविर आयोजन के पश्चात जिला मानसिक स्वास्थ्य की टीम के द्वारा ग्राम चिंगपाल के, हाट बाजार क्लीनिक में भी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा शिविर में उपस्थित मितानिन को मानसिक बीमारियों के बारे में बताया गया जिससे वे मरीजों पहचान कर उन्हें नजदीकी अस्पताल तक लेकर आ सकें।
जेल में ही 68 से अधिक मरीज
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए अभियान के तहत जिले में 158 से अधिक मरीज मिले हैं। इसमें अकेले जेल से ही 68 मरीज मिले है। इसके अलावा वृद्धाश्रम समेत अन्य चिन्हाकिंत जगहों पर भी शिविर के माध्यम से विभाग पहुंचा। जिसके बाद चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। यही वजह है कि अब विभाग समय समय पर शिविर के माध्यम से इन तक पहुंचने की बात कह रहा है।
मानसिक रोग सामान्य बीमारी है
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मोनिका ने बताया कि मानसिक रोग अब अभिशाप नहीं रहा, लक्षण दिखते ही चिकित्सक से संपर्क कर हर इंसान को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति कभी भी मानसिक रोग से ग्रसित हो सकता है। समाज द्वारा मानसिक रोगियों के प्रति अच्छा व्यवहार हो इसके लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है, उचित उपचार और समाज के स्नेह से मानसिक रोगी स्वस्थ हो सकते हैं।
इनकी मिल रही आदिवासियों में शिकायत
शिविर में ग्रामीणों में नींद कम आना, सिर भारी रहना, ज्यादा गुस्सा करना, अवसाद, नशे के कारण याददाश्त में कमी, घबराहट तथा बेचैनी जैसी समस्याओं का उपचार किया गया। शिविर में आये लोगों को अपने आसपास रहने वाले ऐसे लोग, जो मानसिक रोग से पीडि़त है उन्हें उचित उपचार के लिए प्रेरित करने और अस्पताल में इलाज करवाने हेतु जागरूक किया गया।
शिकायत के बताई अपनी शिकायत
शिविर में अपना इलाज करवाने आये 40 वर्षीय बुधराम (बदला हुआ नाम) ने बताया कि कुछ समय से मुझे सोने में बहुत कठिनाई होती थी, मैं अपनी नींद पूरी नही कर पा रहा था इस कारण दिन में बहुत अधिक थका हुआ रहने से तनावग्रस्त महसूस करने लगा था। आज शिविर में अपनी समस्या के बारे में जब डॉक्टर को बताया तो उन्होंने मुझे नींद नही आने की समस्या (इंसोमेनिया) के कारणों के बारे में बताया। उन्होंने मुझे सोने से पहले खुद को नियमित रूप से स्वच्छ रखने, नशापान का सेवन न करने, समय पर भोजन करने और व्यायाम की सलाह दी और एक सप्ताह की दवा देकर, इलाज के लिये पुन: आने को कहा है।