
मानवीय संवेदना ताक में रख मृतकों का भुगतान भी खुद डकार गए दोषी
जयपुर
जलदाय विभाग के गांधीनगर सब डिविजन के जवाहरनगर कार्यालय में सामने आए 1 करोड़ 39 लाख रुपए से अधिक के गड़बड़झाले में दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों ने मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह से ताक पर रख दिया। सरकारी धन के गबन के इस मामले में दोषी कार्मिक मृतक कार्मिकों का हक उनके आश्रितों को देने की बजाय खुद ही डकार गए। आश्रितों को फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई। कर्मचारियों के सेवानिवृत हो जाने के बावजूद उसके नाम से वेतन उठाने के साथ अन्य गड़बडय़िां की गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग भी अब हरकत में आ गया है।
विभाग ने मामले में अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी है। मुख्य अभियंता प्रशासन के निर्देश पर जयपुर नगर वृत्त दक्षिण के अधीक्षण अभियंता ने संबंधित अधिकारी को मामले के संबंध में अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जांच में दोषी पाए गए कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ जवाब तलब शुरू कर दिया गया है।
आईएफएमएस सिस्टम भी फेल
विभाग की ओर से वित्तीय अनियमितता के लिए करवाई गई विशेष जांच में इस पूरे गड़बड़झाले को सरकारी पे—मैनेजर भी नहीं पकड़ पाया। आईएफएमएस सिस्टम के पे—मैनेजर पर रोका नहीं जा सका। ऐसे में जांच रिपोर्ट में आईएफएमएस सिस्टम में सुधार की जरूरत भी बताई गई है।
25 कार्मिकों के नाम पर रिकवरी
रिटायर्ड पंप चालक कैलाश चंद वर्मा, रिटायर्ड सहायक मूलचंद सैनी, रिटायर्ड पंप चालक सेवाराम, रिटायर्ड पंप चालक गोपाल सिंह, रिटायर्ड मी.नि. मदनलाल रैगर, मृतक दरबान सिंह, मृतक डूंगर सिंह, मृतक श्रवण सिंह, सत्यनारायण विजय मी.नि., बद्रीलाल मीणा, पप्पूलाल, सुवालाल, लक्ष्मण महावर, किशन शर्मा, जगदीश नारायण मीणा, रमेश चंद मीणा, श्योराम मीणा, सीताराम चवरिया, मृतक इकबाल, कजोड़, गोविंद सिंह, छोटूराम मीणा, कनिष्ठ लिपिक दीपक विजय, वरिष्ठ लिपिक ज्ञानचंद मीणा और बाहरी व्यक्ति गिर्राज मीणा के नाम सूची में शामिल कर रिकवरी निकाली गई है।
केस ..1
खुद डकार गया राशि
सहायक के पद पर कार्यरत डूंगर सिंह मीणा की मृत्यु 21 जुलाई 2014 को हो गई थी। उसकी 120 पीएल शेष थी लेकिन 300 पीएल का 2 लाख 33 हजार 200 रुपए का भुगतान 6 अगस्त 2014 को किया गया। यह भुगतान रिकॉर्ड में हेराफेरी करके मृतक के आश्रित को नहीं करके कार्यालय में कार्यरत रमेश चंद मीणा सहायक के बैंक खाते में किया गया।
केस 2
मरने के बाद भी उठाया वेतन
सहायक के पद पर कार्यरत डूंगर सिंह मीणा की मौत के बावजूद न केवल अधिक पीएल का भुगतान उठाया गया बल्कि मौत के बावजूद उसका वेतन भी उठाया गया। जून 2014 और अगस्त 2014 का कुल करीब 38 हजार 927 रुपए का भुगतान उठाया गया। इसके साथ ही पंप चालक कैलाश चंद वर्मा के रिटायर होने के बावजूद इसका दिसंबर 2014 का वेतन आहरित किया गया।
केस 3
आश्रित को फूटी कौड़ी तक नहीं
सहायक के पद पर कार्यरत इकबाल की मृत्यु 21 अक्टूबर 2016 को हो गई थी। उसकी 97 पीएल बकाया थी लेकिन 300 पीएल का 3 लाख 43 हजार 360 रुपए का भुगतान 10 दिसंबर 2016 को मृतक के आश्रित या पत्नी को नहीं किया गया। इस राशि का भुगतान कार्यालय के कार्मिक रमेशचंद मीणा के खाते में किया गया।
केस 4
पीएल का पूरा भुगतान उठाया
सहायक के रूप में कार्यरत दरबान सिंह की मृत्यु 22 अक्टूबर 2012 को हो गई थी। 42 पीएल की जगह 300 पीएल का 2 लाख 28 हजार 72 रुपए का भुगतान उठाया गया। यह भुगतान मृतक के खाते में किया गया जबकि भुगतान मृतक के आश्रित के खाते में किया जाना था।
केस 5
बाहरी व्यक्ति को किया भुगतान
सहायक के रूप में कार्यरत गोपाल की मृत्यु 24 दिसंबर 2015 को हो गई थी। 121 पीएल की जगह 300 पीएल का 3 लाख 67 हजार 263 रुपए का भुगतान 27 फरवरी 2016 को किया गया। लेकिन यह भुगतान मृतक के आश्रित या पत्नी के खाते में नहीं करके बाहरी व्यक्ति बस्सी निवासी गिर्राज मीणा के खाते में जालसाजी करते हुए किया गया।
केस 6
यूडीसी ने उठाया मृतक का भुगतान
सहायक श्रवण सिंह की मृत्यु 20 जनवरी 2017 को हो गई थी। लेकिन इसके बावजूद फरवरी 2017 के वेतन का भुगतान किया गया। फिटर रामपाल की मृत्यु 24 दिसंबर 2015 को हो गई। लेकिन गलत तरीके से दो महीने का फर्जी तरीके से वेतन का भुगतान यूडीसी दीपक विजय के खाते में किया गया। इसके साथ ही बाहरी व्यक्ति गिर्राज मीणा के खाते में भी राशि का भुगतान किया गया।
Published on:
31 May 2018 10:07 pm
