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जयपुर में दौड़ रही गाड़ी का पंजाब में चालान, मैसेज आया तो चौंक गया मालिक, बोला: न मैं कभी गया और न गाड़ी

PUNJAB POLICE: रोहित ने चालान के मैसेज को खोलकर देखा तो मामला और भी पेचीदा हो गया। चालान के साथ अटैच फोटो में जो गाड़ी पंजाब की सड़क पर दौड़ रही है।

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मनीष चतुर्वेदी

जयपुर। राजधानी में दौड़ रही एक गाड़ी का चालान पंजाब पुलिस ने काट दिया। पीड़ित गाड़ी मालिक अब पुलिस के चक्कर काट रहा है, उसे समझ नहीं आ रहा कि जयपुर में गाड़ी का चालान पंजाब के संगरूर में कैसे कट गया। पीड़ित अविनाश कुमावत ने बताया कि उनकी गाड़ी (नंबर: RJ 14 GN 9474) है। जो सिरसी रोड और वैशाली नगर इलाके में पानी के कैंपर सप्लाई करने का काम करती है। अविनाश का दावा है कि उनकी गाड़ी आज तक जयपुर शहर की सीमा से बाहर नहीं गई, पंजाब जाना तो बहुत दूर की बात है।

अविनाश के भाई रोहित कुमावत गाड़ी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि 365 दिन पानी की सप्लाई होती है, ऐसे में वे चाहकर भी गाड़ी को एक दिन के लिए भी बाहर नहीं ले जा सकते। लेकिन 20 दिसंबर को जब उनके मोबाइल पर पंजाब के संगरूर में चालान कटने का मैसेज आया तो वह डर गए।

एक नंबर की दो गाड़ियां: जयपुर में 'पीली', पंजाब में 'सफेद'

जब रोहित ने चालान के मैसेज को खोलकर देखा तो मामला और भी पेचीदा हो गया। चालान के साथ अटैच फोटो में जो गाड़ी पंजाब की सड़क पर दौड़ रही है, उसका नंबर तो रोहित की गाड़ी जैसा ही है, लेकिन उसका रंग सफेद है। जबकि जयपुर में खड़ी रोहित की असली गाड़ी का रंग पीला है। यह साफ तौर पर नंबर प्लेट के फर्जीवाड़े या तकनीकी खामी का मामला लग रहा है। रोहित का कहना है कि उनकी नंबर प्लेट का इस्तेमाल कर पंजाब में कोई दूसरी गाड़ी अवैध रूप से चलाई जा रही है, जो सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा हो सकता है।

पुलिस और सिस्टम ने किया परेशान, अब पीड़ित बोला- 'भर दूंगा चालान'..

2000 रुपए के इस गलत चालान को लेकर रोहित जयपुर स्थित यातायात विभाग के कार्यालय 'यादगार' पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें मदद के बजाय केवल भ्रमित किया गया।

  • एक पुलिसकर्मी ने कहा: "पंजाब पुलिस का मामला है, वहीं जाकर बात करो।"
  • दूसरे ने कहा: "कोर्ट जाकर केस दर्ज करवाओ।"
  • तीसरे ने सलाह दी: "पुलिस थाने में जाकर एफआईआर करवाओ।"
  • चौथे ने कहा: ई परिवहन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराओ

रोहित ने ई-परिवहन पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। सिस्टम की इस खींचतान से परेशान होकर रोहित ने थक-हारकर कहा, "मैं गरीब आदमी हूं, काम धंधा छोड़कर पंजाब या कोर्ट के चक्कर नहीं लगा सकता। अगर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरी में चालान भर दूंगा। ताकि फालतू की कानूनी परेशानी से बच सकूं।

मामला 2 हजार का नहीं, सुरक्षा का..

पीड़ित अविनाश का कहना है कि यह मामला केवल 2000 रुपए के चालान का नहीं है, बल्कि 'हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट' के दावों के बीच एक ही नंबर पर दो राज्यों में गाड़ियां दौड़ने का है। अगर पंजाब में दौड़ रही उस सफेद गाड़ी से कोई बड़ी वारदात हो जाती है, तो इसका खामियाजा हमको भुगतना पड़ सकता है।