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जयपुर के मसाला चौक से शातिर बदमाश गिरफ्तार, ADG पुलिस का सेक्रेटरी बताकर कर रहा था ये कांड

जयपुर के मसाला चौक से शातिर बदमाश गिरफ्तार, ADG पुलिस का सेक्रेटरी बताकर कर रहा था ये कांड
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jaipur police

जयपुर।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एडीजी का निजी सचिव बनकर लोगों से ठगी करने वाले एक युवक को एसीबी ने ही जाल बुनकर गिरफ्तार करवाया। रामगंज थाना पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है। आरोपी सरकारी नौकरी और खासतौर पर एसीबी में ही नौकरी लगाने का झांसा दे लोगों से रकम एेंठ रहा था। एसीबी और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुनियोजित जाल बुनकर आरोपी शख्स को जयपुर के मसाला चौक से गिरफ्तार किया।

आरोपी पर किसी को शक ना हो, इसलिए अपनी गाड़ी के आगे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अतिरिक्त निजी सचिव लिखी बड़ी प्लेट लगा रखी थी। गिरफ्तार संदीप सिंह जादौन धानका धौलपुर के राजाखेड़ा निवासी है। आरोपी यहां पर आमेर स्थित हाथी गांव में किराए के मकान में रहता है। उसके खिलाफ नींदड़ राव का रास्ता निवासी अनम नाज ने एसीबी में शिकायत की थी।

शिकायत में कहा गया था कि उससे आरोपी ने एसीबी में नौकरी लगाने के नाम पर दो लाख रुपए ले लिए। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वसीम अली और आदिल रहमानी के पुत्र से भी दो-दो लाख रुपए राजस्थान विश्वविद्यालय में नौकरी लगाने का झांसा दे ले लिए थे।

एसीबी में नौकरी निकलने पर संपर्क किया
उधर, एसीबी के विधि अधिकारी से भी कुछ लोगों ने संपर्क साधा। उन्होंने जानकारी ली कि एसीबी में कुछ पदों पर नौकरी निकली है। विधि अधिकारी ने इनकार कर दिया तो लोगों ने बताया कि एक युवक दो दो लाख रुपए लेकर एसीबी में नौकरी लगाने की गारंटी दे रहा है। अन्य सरकारी विभागों में भी नौकरी लगाने का झांसा दे रहा है, तब एसीबी ने आरोपी को पकडऩे के लिए जाल बुना।

मसाला चौक बुलाकर किया गिरफ्तार
एसीबी और रामगंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने बोगस ग्राहक से आरोपी को फोन करवाया और मसाला चौक में दुकान दिलाने के लिए कहा। इस पर आरोपी दस लाख रुपए में मसाला चौक में दुकान दिलाने को तैयार हो गया। उसे मसाला चौक बुलाया, वहां पर आरोपी के आते ही उसे पकड़ लिया।

गाड़ी पर प्लेट लगाने की सूचना पर किया था पाबंद
एसीबी को कुछ माह पहले भी आरोपी के संबंध में सूचना मिली थी। तब यह पता चला था कि आरोपी अपनी गाड़ी पर एसीबी की नंबर प्लेट लगा लोगों में रौब जमाता है। इस पर एसीबी में उसे बुलाया गया और गाड़ी से नंबर प्लेट हटा हिदायत दी थी। लेकिन कुछ समय बाद ही आरोपी ने फिर से एसीबी के नाम की प्लेट लगा ली।