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जयपुर। राजस्थान में एयरोस्पेस एवं डिफेंस नीति, सेमीकंडक्टर और इंडस्ट्रियल पार्क प्रमोशन पॉलिसी लागू हो गई है। इन नीतियों से प्रदेश को रक्षा, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में बढ़ावा मिलेगा। डिफेंस और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने के साथ-साथ सेमीकंडक्टर डिजाइन से लेकर निर्माण तक का संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित हो सकेगा।
दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय राजमार्गों का विशाल नेटवर्क, पर्याप्त भूमि की उपलब्धता के साथ-साथ विभिन्न धातुओं की सुलभता प्रदेश को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का हब स्थापित करने में कारगर साबित होगी। स्टील, तांबे और पीतल की यूनिट का मेटल मशीनिंग सेक्टर गोला-बारूद और डिफेंस के पुर्जे बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
-तैयार होंगे चिप डिजाइन एक्सपर्ट
-बंदूक और आर्मर्ड वाहन (बख्तरबंद गाड़ी) बनाने वाली यूनिट लगेंगी
-प्रदेश में बनेंगे विमान, हेलीकॉप्टर, रडार, ड्रोन, मिसाइल और एवियोनिक्स
लार्ज: 50-300 करोड़ रुपए निवेश
मेगा: 300-1000 करोड़ रुपए
अल्ट्रा मेगा: 1000 करोड़ रुपए से अधिक
लार्ज: 25 से 100 करोड़ रुपए निवेश
मेगा: 100 से 250 करोड़ रुपए
अल्ट्रा मेगा: 250 करोड़ से अधिक निवेश
विमान, यूएवी (मानवरहित हवाई वाहन), मिसाइल, एवियोनिक्स, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, एमआरओ (मेंटीनेंस, रिपेयर एंड ऑपरेशंस) और प्रिसिजन इंजीनियरिंग (इसमें उच्च सटीकता और जटिलता वाले कल-पुर्जे व सिस्टम बनाए जाते हैं) निर्माण कार्य वाली इकाइयां स्थापित होंगी। प्रदेश में बंदूक और आर्मर्ड वाहन बनाने की यूनिट लगाई जाएंगी।
निवेशकों को देंगे यह छूटें: बिजली ट्रांसमिशन और अन्य चार्जेज में छूट, सात साल तक बिजली शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। 7 साल तक मंडी और बाजार शुल्क भी वापस मिलेगा। स्टाम्प या जमीन रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट और 25 प्रतिशत राशि वापस दी जाएगी।
चिप डिजाइन से लेकर चिप बनाने तक का पूरा सिस्टम राजस्थान में ही विकसित होगा।
देंगे यह छूटें: 7 वर्ष तक बिजली शुल्क में पूर्ण छूट, स्टाम्प शुल्क और भू-रूपांतरण शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी। टर्म लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान, पर्यावरणीय परियोजनाओं पर लागत का 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, रोजगार प्रोत्साहन। राजस्थान ग्रीन रेटिंग सिस्टम के तहत प्रमाणित इकाइयों को सहमति शुल्क में 50 प्रतिशत (अधिकतम 12.5 करोड़ रुपए)
राजस्थान को बड़ा औद्योगिक हब बनाने के लिए यह नीति तैयार की गई है। इसमें निजी डवलपर्स को औद्योगिक पार्क विकसित करने की अनुमति होगी, लेकिन निगरानी रीको के तहत रहेगी।
ये सुविधाएं: 100 एकड़ से 250 एकड़ तक के औद्योगिक पार्कों के लिए 20 करोड़ रुपए से 40 करोड़ रुपए की पूंजीगत सब्सिडी। स्टाम्प शुल्क, रूपांतरण शुल्क पर 25 प्रतिशत भुगतान से छूट एवं 25 प्रतिशत पुनर्भरण।
Updated on:
22 Mar 2026 08:25 am
Published on:
22 Mar 2026 08:25 am
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