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कहीं देसी घी और शुद्ध तेल के नाम पर ये घटिया चीज तो नहीं खा रहे आप, जयपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, नामी ब्रांडस के पैक मिले

Jaipur Rural Police Action: जयपुर ग्रामीण पुलिस ने बांसा गांव में नकली घी बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। आरोपी सोयाबीन तेल और वनस्पति में केमिकल मिलाकर नामी ब्रांड्स के नाम पर बेच रहा था। जानिए कैसे बचें इस मिलावट से।

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जयपुर ग्रामीण पुलिस का एक्शन

जयपुर ग्रामीण पुलिस का एक्शन

Fake Ghee Factory Jaipur: राजस्थान के जयपुर ग्रामीण इलाके में मिलावटखोरों के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। जयपुर ग्रामीण एसपी (SP) हनुमान प्रसाद मीणा के निर्देशन में जिला स्पेशल टीम (DST) ने सामोद थाना क्षेत्र के बांसा गांव में चल रही एक नकली घी बनाने की फैक्ट्री पर छापा मारा है। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके के मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।

जेल से छूटते ही फिर शुरू किया मौत का कारोबार

हैरानी की बात यह है कि मुख्य आरोपी पहले भी इसी अपराध में पकड़ा जा चुका था। करीब 6 महीने पहले भी DST टीम ने इसी स्थान पर कार्रवाई की थी, लेकिन जेल से छूटकर आने के बाद आरोपी ने दोबारा वही काला धंधा शुरू कर दिया। आरोपी आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हुए सोयाबीन तेल और वनस्पति घी में एसेंस (Essence) मिलाकर नकली घी तैयार कर रहा था।

भारी मात्रा में बरामदगी और नामी ब्रांड्स के रैपर

एएसपी (ASP) रजनीश पूनिया के सुपरविजन में की गई इस छापेमारी में पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में मिलावटी सामान जब्त किया है:
नकली घी: एक-एक किलो के 22 तैयार पैकेट।
कच्चा माल: 13 पीपे वनस्पति तेल और सोयाबीन तेल।
पैकिंग सामग्री: सरस (Saras), कृष्णा और लोटस जैसे नामी ब्रांड्स के हजारों खाली रैपर।
उपकरण: घी पैक करने वाली आधुनिक मशीनें।
कार्रवाई के दौरान सरस डेयरी के प्रतिनिधियों को भी मौके पर बुलाया गया ताकि शुद्धता की जांच की जा सके। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 180 ग्राम तैयार मिलावटी सैंपल भी बरामद किया है।

सामोद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

इस बड़ी कार्रवाई ने स्थानीय सामोद पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बना दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब बांसा गांव में इतने बड़े स्तर पर नकली घी का कारखाना चल रहा था, तो स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? चर्चा यह भी है कि नशे के सौदागर हों या मिलावटखोर, अधिकतर बड़ी कार्रवाइयों को केवल DST टीम ही अंजाम दे रही है, जबकि स्थानीय थाना पुलिस मौन साधे बैठी रहती है।

असली और नकली घी की पहचान कैसे करें

नकली घी न केवल आपके पैसे की बर्बादी है, बल्कि यह आपके लीवर और दिल के लिए भी खतरनाक है। मिलावटी घी को पहचानने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके:

  • हथेली पर रगड़े: थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर रखें। अगर यह तुरंत पिघलने लगे और इसकी खुशबू प्राकृतिक लगे, तो यह असली है। नकली घी को पिघलने में समय लगता है और वह चिपचिपा महसूस हो सकता है।
  • नमक का टेस्ट: एक चम्मच घी में थोड़ा सा नमक और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का रंग लाल या बैंगनी होने लगे, तो समझ लीजिए इसमें 'वनस्पति' या घटिया तेल मिला हुआ है।
  • आयोडीन टेस्ट: पिघले हुए घी में दो बूंद आयोडीन मिलाएं। अगर घी का रंग नीला हो जाता है, तो इसका मतलब है कि इसमें उबले हुए आलू या 'स्टार्च' की मिलावट की गई है।
  • रंग और दाना: असली घी का दाना एक समान होता है। अगर घी बहुत ज्यादा सफेद या बहुत ज्यादा गहरा पीला है, तो इसमें आर्टिफिशियल रंगों (Chemical Colors) का इस्तेमाल हो सकता है।
  • खुशबू की जांच: मिलावटी घी में अक्सर 'एसेंस' (Essence) डाला जाता है जिसकी खुशबू बहुत तेज होती है, जबकि शुद्ध घी की महक सौंधी और प्राकृतिक होती है।

चेतावनी: नकली घी का सेवन लिवर, किडनी और हृदय रोगों का मुख्य कारण बन रहा है। खरीदारी करते समय हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही सामान लें और होलोग्राम या क्यूआर कोड की जांच जरूर करें।

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