
सीमा की शादी में पहुंचे आर्मी के जवान (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)
जयपुर। जिले के खेजरोली क्षेत्र की बाघवाली ढाणी में आयोजित एक विवाह समारोह ने रिश्तों, जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। यह शादी सीमा सामोता की थी- एक ऐसी बेटी, जिसने बचपन से ही अपनों को खोने का दर्द सहा, लेकिन उसके जीवन के इस खास दिन पर पूरा परिवार और उसके पिता के साथी जवान उसके साथ खड़े नजर आए।
सीमा की जिंदगी संघर्षों से शुरू हुई। जन्म के सिर्फ छह दिन बाद ही मां अनिता देवी का निधन हो गया। पिता मंगलचंद सामोता भारतीय सेना में थे और 1997 में भर्ती हुए थे, लेकिन लंबी बीमारी के बाद वर्ष 2006 में उनका भी देहांत हो गया। उस समय सीमा महज छह साल की थीं। इसके बाद उनका पालन-पोषण उनके चाचा जयपाल सामोता, चाचा प्रभात सामोता, श्रवण सामोता और सीताराम सामोता समेत पूरे परिवार ने मिलकर किया। मौसी इंद्रा देवी ने भी मां की तरह उनकी परवरिश में अहम भूमिका निभाई।
परिवार के सहयोग से सीमा ने पढ़ाई जारी रखी, ग्रेजुएशन पूरा किया और फोर्थ ग्रेड की परीक्षा भी पास की, हालांकि अभी जॉइनिंग बाकी है। इस बीच परिवार ने पूरे स्नेह और जिम्मेदारी के साथ उनकी शादी की तैयारी की। सोमवार को सीमा की शादी गोविंदगढ़ के सरगोठ निवासी ताराचंद जाट के साथ संपन्न हुई।
शादी को खास बनाने वाला पल तब आया, जब सीमा के पिता के साथी सैनिक इस समारोह में पहुंचे। जाट रेजिमेंट के करीब 25 जवानों ने इस शादी में हिस्सा लिया। इन जवानों ने न सिर्फ मेहमान बनकर, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हर जिम्मेदारी निभाई।
सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब जवानों ने चारों कोनों से चूंदड़ी पकड़कर सीमा को स्टेज तक पहुंचाया। यह पल वहां मौजूद हर शख्स के दिल को छू गया। इसके साथ ही जवानों ने कन्यादान की रस्म निभाई और बेटी को आशीर्वाद दिया। सेना के इन साथियों ने 1.31 लाख रुपए, कपड़े और घरेलू सामान भेंट कर अपना स्नेह और कर्तव्य निभाया।
शादी समारोह में जहां एक ओर डीजे और आतिशबाजी के बीच खुशी का माहौल था, वहीं दूसरी ओर यह एहसास भी गूंज रहा था कि वर्दी वाले रिश्ते सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं रहते। जवानों ने यह भी भरोसा दिलाया कि वे आगे भी परिवार के हर सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे।
यह शादी सिर्फ एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह उस अटूट रिश्ते की कहानी थी, जो वर्दी के साथ जुड़ा होता है। यह दिखाती है कि सेना में साथ निभाने का वादा सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह परिवारों तक भी फैल जाता है।
Updated on:
22 Apr 2026 11:00 am
Published on:
21 Apr 2026 06:43 pm
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