
जयपुर। पूरे देश में गणतंत्र दिवस को लेकर खासी तैयारियां चल रही है। तो वहीं दूसरी ओर इस गणतंत्र के भविष्य को उज्जवल बनाने में जितना हमारे वीर जवानों और स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान रहा है, उतना ही योगदान देश के नौनिहालों का भी रहा है। बात अगर 26 जनवरी की हो, तो देश के मुस्तकबिल का जिक्र भी होना चाहिए। देश में जहां बेटों ने सफलता के कई झंडे गाडे तो वहीं आज के दौर में देश की बेटियां भी किसी से पीछे नहीं है। चाहे युद्ध पर मोर्चा संभालने की बात हो, या फिर खेल में हर जगह पर इनका उम्मदा प्रदर्शन रहा है। आज हम आपको राजस्थान की एक ऐसी ही बेटी से रुबरु करवा रहे हैं जो इतनी कम उम्र में अच्छे-अच्छों की पसीने छुड़ा देती है। साथ ही अपने इसी हुनर के जरिए देश का नाम ऊंचा कर रही है।
राजस्थान के कोटा जिले की रहने वाली ये बेटी आज केवल कोटा की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटी बन चुकी है। कम उम्र में ही स्वर्ण पदक जीत देश का गौरव बढ़ा चुकी है। वीडियों में आप कोटा की सड़कों पर निकलता जुलूस देख रहे हैं, जो कुछ दिन पुराना है, पर यादें ताजा करा रहा है जब अरुंधती चौधरी सर्बिया में आयोजित इंटरनेशनल जूनियर यूथ बॉक्सिंग में भारत के लिए गोल्ड पदक जीतकर लौटी थी।
तो वहीं अपनी इस जीत को लेकर अरुंधती चौधरी ने कुछ कहा था, जिसे सुनकर मुणव्वर राणा का शेर याद आता है- यूं ही चलकर नहीं ये तर्जे सुखन आया है, पांव दाबे हैं बुजुर्गों के तो ये फन आया है। वाकई ऐसी प्रतिभावन बच्चों के हुनर को देख आप भी गर्व महसूस करेंगे।
गणतंत्र के मौकों पर पत्रिका टीवी होनहार बच्चों का जिक्र कर रहा है। वो इसलिए कि आने वाले कल का हिन्दुस्तान ये ही हैं। ऐसे में इस बॉक्सर का ये प्रण की कोटा में रह कर ही शहर और राज्य के लिए कुछ करना है, मिसाल को और बड़ा बना देता है।
Published on:
25 Jan 2018 06:00 pm
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