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परनामी ने दी अवैध निर्माणकर्ताओं को छूट, बढा हौंसला, राज्यभर में बढे कब्जे और अवैध निर्माण, जनता मायूस

राज्यभर में बेधड़क हो रही अदालत के आदेश की अवमानना
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जयपुर

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Bhavnesh Gupta

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Updated: 23 Nov 2017, 9:00 PM IST

jaipur

जयपुर। वोटरों को हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के लिए उकसाने वाले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और विधायक अशोक परनामी के बयान का असर दूर तक जाता नजर आ रहा है। सरकारी दफ्तरों में शिकायत करने वालों की संख्या अचानक घट गई है। वहीं, परनामी के बयान को ही सरकार का रुख समझकर लोकसेवक आंख के साथ अब कान भी बन्द कर रहे हैं। इससे राज्य में अवैध कब्जे और निर्माण करने वालों के हौसले बुलन्द हो रहे हैं।


राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो जयपुर सहित राज्य के ज्यादातर शहर-कस्बों में हालात अराजक नजर आए। पड़ताल में सामने आया कि हाईकोर्ट के कई बार फटकार लगाने और आदेश देने के बावजूद कार्रवाई होने की बजाय अवैध इमारतें धड़ाधड़ खड़ी हो रही हैं। कब्जे और अवैध निर्माण करने वालों को न पर्यावरण की परवाह है, न जनता की सुविधा की फिक्र। न अदालत का डर है और न नियम-कायदों की चिन्ता। कहीं नदी-नालों के बहाव क्षेत्र में धड़ल्ले से निर्माण हो रहे हैं, कहीं सुविधा क्षेत्र पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं लेकिन जिम्मेदार मौन हैं।

यह कहा था परनामी ने

परनामी पिछली 18 नवम्बर को सड़क का शिलान्यास करने अपने विधानसभा क्षेत्र के जवाहर नगर सेक्टर-4 में पहुंचे थे। वहां कुछ लोगों ने पार्किंग की परेशानी बताई तो परनामी ने पार्क को ही गाडिय़ां खड़ी करने के काम में लेने की हरी झंडी दे दी। उन्होंने कहा, हाईकोर्ट की रोक है इसलिए हम तो कुछ नहीं कर सकते पर आप लोग उद्यान की जमीन को पार्किंग में बदल दो। हम आंखें बन्द कर लेंगे। कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। यह बात उन्होंने तीन बार दोहराई।

इसलिए बढ़ रही अराजकता
परनामी के रवैये की प्रदेशभर में तीखी आलोचना हो रही है लेकिन सरकार के मंत्री अप्रत्यक्ष तौर पर उनके बयान के साथ ही खड़े नजर आ रहे हैं। मीडिया के सवालों पर संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने जवाब तो दिया लेकिन यह कहकर बचाव ही करते नजर आए कि बयान उनका व्यक्तिगत मत हो सकता है। ऐसे में अवैध निर्माण करने वालों को शह मिल रही है।

जनता मायूस, शिकायतें चौथाई रह गईं

- 91 शिकायतें दर्ज हुई थीं जयपुर नगर निगम में अक्टूबर में अवैध निर्माण की, लेकिन नवम्बर में अब तक 20 लोग ही पहुंचे हैं शिकायतें लेकर
- 63 शिकायतकर्ता पहुंचे थे अतिक्रमणों के खिलाफ अक्टूबर में नगर निगम में लेकिन नवम्बर में अब तक यह आंकड़ा 23 ही है, जबकि अक्टूबर से पहले तक आंकड़ा थोड़ा ही ऊपर-नीचे होता रहा है

- 202 शिकायतें जेडीए कंट्रोल रूम पहुंची थीं अवैध निर्माण व अतिक्रमण की अक्टूबर में लेकिन नवम्बर में तीन चौथाई शिकायत भी नहीं आईं


(विशेषज्ञ कहते हैं कि शिकायतों का निस्तारण नहीं हो तब ऐसे हालात बनते हैं कि जनता शिकायत करना ही छोड़ देती है। शिकायतों का आंकड़ा घटाने के लिए लोकसेवकों ने इसे साधन ही बना लिया है)

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