History of the Sahariya tribe : जंगलों से निकलकर विधानसभा तक पहुंचे सहरिया…जानिए सहरियाओं का इतिहास
राजस्थान की एकमात्र आदिम जाति है सहरिया। सहरिया आदिकाल से जंगलों में निवास करते आ रहे हैं। यह जनजाति बारां जिले के किशनगंज एवं शाहाबाद तहसीलों में निवास करती है। जिले के कुछ अन्य हिस्सों में भी बिखरे हुए रूप से सहरिया रहते हैं।
राजस्थान की एकमात्र आदिम जाति है सहरिया। सहरिया आदिकाल से जंगलों में निवास करते आ रहे हैं। यह जनजाति बारां जिले के किशनगंज एवं शाहाबाद तहसीलों में निवास करती है। जिले के कुछ अन्य हिस्सों में भी बिखरे हुए रूप से सहरिया रहते हैं।
आदिवासी सहरिया वर्षों से गरीबी का जीवन जी रहे हैं। आज भी कई क्षेत्रों में जंगलों से जुड़कर ही इनका वजूद बना हुआ है तो कई सहरिया जंगलों से निकलकर समाज की मुख्यधारा से जुडऩे लगे हैं।
सरकार की ओर से इनके उत्थान के लिए कई योजनाएं भी संचालित है। कई वर्षों पहले इनके लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उसके अलावा शिक्षा से जोडऩे के लिए कई स्कूल, छात्रावास खोले गए।
इसके नतीजन यह वर्ग भी काफी हद तक शिक्षा से जुडऩे लगा। आज जिले के सहरिया वर्ग में से कई युवा पुलिस में शामिल हैं। इनमें से एक सहरिया रामप्रसाद तो अब उपनिरीक्षक पद तक पहुंच गए हैं।
इसके अलावा वन विभाग व एएनएम भर्ती में भी कई सहरिया युवक-युवतियों को जगह मिली है। बारां जिले की किशनगंज-शाहाबाद तहसीलों में करीब 20 हजार सहरिया परिवार निवास करते हैं। विधानसभा में किशनगंज सीट जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है।
इस सीट से दिवंगत हीरालाल सहरिया विधायक भी बने, 2008 के चुनावों में हीरालाल सहरिया की पुत्री निर्मला सहरिया विधायक बनी थी। अभी हजारों की संख्या में सहरियाओं के बच्चे सरकारी स्कूलों में शिक्षा पा रहे हैं।