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वकीलों के चक्काजाम से 10.30 घंटे जाम रहा जयपुर, 15000 वाहन फंसने से छूटी ट्रेन-बस, 22000 लीटर तक पेट्रोल-डीजल का हुआ नुकसान

Traffic Jam In Jaipur Lawyer Protest: वकीलों के चक्काजाम के चलते जयपुर में करीब 10.30 घंटे तक यातायात व्यवस्था चरमराई रही और 15 हजार वाहन जाम में फंसे रहे। इससे ट्रेन-बस पकड़ने वाले हजारों यात्रियों और स्कूली बच्चों को परेशानी हुई।
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जाम में फंसे वाहनों की लंबी कतार की दिन और रात का फोटो: पत्रिका

Jaipur Chakka Jam: किसी को ट्रेन पकड़नी थी, कोई बस के इंतजार में था, बच्चों को स्कूल से घर पहुंचना था और हजारों लोगों को कार्यस्थल आना-जाना था, लेकिन मंगलवार दोपहर जयपुर में सबकी मंजिल जाम में अटक गई। सेशन कोर्ट के बाहर वकीलों के पूर्व घोषित चक्काजाम को लेकर पुलिस प्रशासन की 'शून्य तैयारियों' ने आधे शहर को करीब साढ़े दस घंटे 'बंधक' बना दिया। वाहन रेंगते रहे, वैकल्पिक रास्ते भी जाम हो गए।

विवाद की शुरुआत शनिवार को सेशन कोर्ट परिसर में मेट्रो कोर्ट-2 के भवन के पास टीन शेड लगाने को लेकर हुई। पुलिस के हस्तक्षेप से वकील नाराज हो गए। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे कोर्ट परिसर में नारेबाजी के बाद वकीलों ने दोपहर करीब 12.30 बजे सड़क पर जाम लगा दिया। वकीलों ने सदर थानाधिकारी को निलंबित करने की मांग रखी। मांग के बाद थानाधिकारी को लाइन हाजिर कर दिया गया।

10:30 घंटे तक रेंगती रही राजधानी

  • दोपहर 12 से रात 10:30 बजे तक शहर जाम
  • 0.5 लीटर प्रति घंटा पेट्रोल खर्च यातायात जाम के समय
  • 15 हजार से 22 हजार लीटर पेट्रोल-डीजल ईंधन का नुकसान जाम में
  • 15,000 वाहन फंसे
  • 10 हजार से अधिक ट्रेन-बस यात्री भी हुए परेशान

टाइम लाइन

  • प्रातः 9:00: कलक्ट्रेट-सेशन कोर्ट के आस-पास वकीलों की गतिविधियां बढ़ीं। यातायात प्रभावित।
  • 11:00 बजे: सेशन कोर्ट परिसर में नारेबाजी।
  • 11:15 बजेः अजमेर रोड, 22 गोदाम, सहकार मार्ग और परिवहन मार्ग की ओर डायवर्जन शुरू।
  • 12:00 बजे: मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें। वैकल्पिक रास्ते भी दबाव में आए।
  • 12:30 बजे: वकीलों का चक्काजाम। कलक्ट्रेट से कमिश्नरेट तक यातायात व्यवस्था चरमराई।
  • 1:00 बजे: एमआइ रोड, सी-स्कीम, स्टेच्यू सर्किल और गवर्नमेंट हॉस्टल तक जाम, आमजन घंटों फंसे।
  • 2:00 बजे बादः टोंक रोड, जेएलएन मार्ग, सांगानेर से लेकर सिंधी कैंप, जंक्शन, शास्त्री नगर और झोटवाड़ा तक असर।
  • 5:00 बजे बादः ट्रेन-बस पकड़ने वाले कई यात्रियों को पैदल निकलना पड़ा।
  • रात 10:00 बजे: वकीलों का रास्ता रोकना जारी।
  • रात 10:30 बजे: पुलिस-वकीलों में राजीनामा, धरना खत्म।

स्पष्ट चेतावनी, फिर भी बेखबर

पुलिस के रवैये से नाराज वकीलों ने सोमवार देर शाम ही चेतावनी दी थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो मंगलवार को सेशन कोर्ट के बाहर जाम किया जाएगा। इसके बावजूद पुलिस कमिश्नरेट के शीर्ष अधिकारियों ने मंगलवार सुबह के लिए यातायात की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की।

दो हिस्सों में बंटा शहर

टोंक रोड, मालवीय नगर, सांगानेर, सी-स्कीम, बापू नगर और जवाहर लाल नेहरू मार्ग से आने वाले वाहन चालक, जो स्टेच्यू सर्कल और गवर्नमेंट हॉस्टल की ओर आगे बढ़ना चाहते थे, एमआइ रोड के आसपास फंस गए। वहीं विद्याधर नगर, मुरलीपुरा, शास्त्री नगर, अंबाबाड़ी और झोटवाड़ा जाने वाले संपर्क मार्ग भी प्रभावित हो गए।

सिंधी कैंप बस स्टैंड और जयपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले प्रमुख रास्तों पर वाहन रेंगते तक नजर नहीं आए। एमआइ रोड और सी-स्कीम की संकरी गलियों में वाहन चालकों ने वैकल्पिक रास्तों से निकलने की कोशिश की तो वहां भी जाम लग गया।
जनता की बेबसी

जयपुर जंक्शन और सिंधी कैंप जाने वाले कई यात्री पैदल ही स्टेशन की ओर जाते दिखे। स्कूलों की छुट्टी के समय बच्चों के वाहन भी जाम में फंसे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों और वाहन चालकों के अनुसार शुरुआती दो घंटे, दोपहर 12.30 से करीब 2.30 बजे तक, पुलिस का कोई वरिष्ठ अधिकारी स्थिति संभालने के लिए सड़कों पर मौजूद नहीं था। जब जाम की कतारें 4-5 किलोमीटर पीछे तक पहुंच गईं, तब पुलिस प्रशासन ने अजमेर रोड, 22 गोदाम, सहकार मार्ग और परिवहन मार्ग की ओर यातायात डायवर्ट करना शुरू किया।

इनका कहना है

पुलिस प्रशासन से वार्ता चल रही है। इसका समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। आम लोगों की परेशानी को देखते हुए भविष्य में इस संबंध में स्थायी समाधान का प्रयास किया जाएगा।
एडवोकेट सोमेशचंद्र शर्मा, अध्यक्ष, द बार एसोसिएशन जयपुर

वकीलों से वार्ता के बाद सदर थानाप्रभारी बृजमोहन कविया को लाइन हाजिर कर दिया है।
प्रशांत किरन, डीसीपी (वेस्ट)

कलक्ट्रेट-सेशन कोर्ट शिफ्ट करना क्यों जरूरी

कलक्ट्रेट, मिनी सचिवालय और जिला परिषद में रोज़ हजारों लोगों की आवाजाही होती है। करीब 2 हजार अधिकारी–कर्मचारी कार्यरत हैं। परिसर में केवल 500 वाहनों की पार्किंग क्षमता है, जबकि आने वाले वाहनों की संख्या कई गुना अधिक है। वाहन सड़कों पर खड़े होते हैं और जाम की स्थिति बनती है। पार्किंग बढ़ाने की गुंजाइश भी कम है।

सेशन कोर्ट परिसर में करीब 175 अदालतें संचालित हैं। करीब 10 हजार पक्षकार और 5 हजार अधिवक्ता–मुंशी की आवाजाही से परिसर पर लगातार दबाव रहता है। पर्याप्त पार्किंग नहीं होने से बड़ी संख्या में वाहन आसपास की सड़कों पर खड़े होते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था बिगड़ती है और जाम लगता है।