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रंग बदलना तो नेताओं का स्वभाव है, देखिए कार्टूनिस्ट सुधाकर का यह कार्टून

रंग बदलना तो नेताओं का स्वभाव है, देखिए कार्टूनिस्ट सुधाकर का यह कार्टून
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रंग बदलना तो नेताओं का स्वभाव है, देखिए कार्टूनिस्ट सुधाकर का यह कार्टून

रंग बदलना तो नेताओं का स्वभाव है, देखिए कार्टूनिस्ट सुधाकर का यह कार्टून

पूरी दुनिया में बेहद दुर्लभ माना जाने वाला गोल्डन कछुआ राजस्थान की राजधानी जयपुर में नजर आया है। इसे जयपुर चिडि़याघर के सुपुर्द कर दिया गया है। यह कछुआ चाकसू के काठावाला तालाब में मिला है. जानकारों ने बताया कि विश्व में छठीं बार ऐसा कछुआ नजर आया है . विशेषज्ञों के मुताबिक कछुए का यह दुर्लभ रंग होने की वजह जेनेटिक म्यूटेशन है। इसके कारण स्किन को रंग देने वाला पिगमेंट बदल गया । परिणामस्वरूप यह सुनहरा दिखाई दे रहा है। मगर हमारे देश के नेताओं के रंग बदलने की वजह दूसरी है. सत्ता में आने से पूर्व जनता से लुभावने वादे करना और फिर सत्ता हासिल हो जाने के बाद उन्हें भूल जाना, हमारे नेताओं की फितरत है. नेताओं को मौकापरस्ती के लिए ही जाना जाता है. वर्तमान समय में राजनीति में वही व्यक्ति टिक पाता है जो हालात के अनुसार अपने आप को बदल ले. सिद्धांतों और नैतिकता को ताक पर रखने वाले नेता ही इस दौर में तरक्की के पायदान पर चढ़ते हैं. नेताओं के इस तरह रंग बदलने की तुलना गिरगिट से भी की जाती है.देखिये इस मुद्दे पर कार्टूनिस्ट सुधाकर का नजरिया.