
एआई तस्वीर
जयपुर। राजस्थान में रेलवे के बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए कई बड़ी रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन लेटलतीफी के चलते बजट दोगुना से ज्यादा बढ़ गया है। केन्द्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग डिवीजन की ओर से 25 जून को जारी रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में चल रही 23 परियोजनाओं की मूल लागत 88,286.45 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर 1,64,998 करोड़ रुपए हो गई है।
अब तक 1,53,744.72 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इनमें से सवाई माधोपुर बाइपास लाइन का 77 प्रतिशत और आगरा फोर्ट-बांदीकुई डबलिंग परियोजना का 56 प्रतिशत कार्य हो चुका है। वहीं जयपुर-सवाई माधोपुर रेल लाइन दोहरीकरण प्रोजेक्ट में 19 प्रतिशत प्रगति हुई है। इनके अलावा पड़ोसी राज्यों के साथ जो योजनाएं संयुक्त रूप से चल रही हैं, उनमें से कुछ की प्रगति धीमी है।
हिल-अंबाजी-आबू रोड नई रेल लाइन परियोजना जुलाई 2022 में स्वीकृत हुई। 116.65 किमी लंबी परियोजना की लागत 2,798.16 करोड़ आंकी गई है। 37 प्रतिशत निर्माण हुआ है और 2,569.32 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके है। इसे जुलाई 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं लूणी-समदड़ी-भीलड़ी डबलिंग परियोजना का 36 प्रतिशत कार्य हुआ है। इसकी लागत 3,085.59 करोड़ रुपए है। अभी तक 835.93 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इस योजना को जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
22 वर्ष पहले स्वीकृत राजस्थान-मध्यप्रदेश की रामगंजमंडी-भोपाल रेल परियोजना की लागत 3,032 करोड़ रुपए से बढ़कर 5,073 करोड़ रुपए हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक 82 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ है। परियोजना की पूर्णता की समय-सीमा दिसंबर 2025 से बढ़ाकर दिसंबर 2027 कर दी गई है।
| क्रम | परियोजना | स्वीकृत लागत (₹ करोड़) | अब तक व्यय (₹ करोड़) | प्रगति |
|---|---|---|---|---|
| 1 | पोकरण-रामदेवरा नई रेल लाइन | 189.21 | 55.58 | 1% |
| 2 | पुष्कर-मेड़ता सिटी रेल लाइन | 799.64 | 211.61 | 8% |
| 3 | नाथद्वारा-नाथद्वारा टाउन नई लाइन | 166.33 | 112.55 | 15% |
| 4 | सवाई माधोपुर-जयपुर रेल लाइन | 1,203.89 | 208.67 | 19% |
| 5 | अजमेर-चंदेरिया डबलिंग | 1,634.79 | 447.64 | 22% |
| 6 | धौलपुर-सरमथुरा गेज परिवर्तन | 747.00 | 509.80 | 49.7% |
| 7 | आगरा फोर्ट-बांदीकुई डबलिंग | 1,390.00 | 529.92 | 56% |
| 8 | देवगढ़ मदारिया-नाथद्वारा गेज परिवर्तन | 968.92 | 730.39 | 73% |
| 9 | सवाई माधोपुर बाईपास लाइन | 304.00 | 84.59 | 77%* |
| 10 | सादुलपुर-चूरू डबलिंग | 468.64 | 195.42 | 94% |
| 11 | आरडीएसओ डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक (फेज-2) | 466.42 | 538.22 | 98% |
-भूमि अधिग्रहण में देरी।
-वन एवं पर्यावरण मंजूरी मिलने में विलंब।
-ठेकेदारों की धीमी कार्य गति या अनुबंध संबंधी समस्याएं।
-लागत बढ़ने के कारण अतिरिक्त बजट की आवश्यकता
-यूटिलिटी शिफ्टिंग (बिजली लाइन, पाइपलाइन आदि) में विलंब।
-भू-वैज्ञानिक एवं तकनीकी कठिनाइयां (विशेषकर पुल, सुरंग और पहाड़ी क्षेत्रों में)।
आरडीएसओ डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक (फेज-द्वितीय) 98 प्रतिशत प्रगति के साथ सबसे आगे है। वहीं गुढ़ा साल्ट से ठठाना मिठड़ी तक बन रहे ट्रायल ट्रैक का 95 प्रतिशत कार्य पूरा होगया है। इसकी मूल लागत 819.48 करोड़ थी, जो बढ़कर अब 967.06 करोड़ हो गई है। योजना पर 405.39 करोड़ खर्च हो चुके हैं। रेवाड़ी-काढूवास डबलिंग परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य हो गया है। करीब 352 करोड़ की लागत की इस योजना पर 325.79 करोड़ खर्च हो गए हैं।
Published on:
27 Jun 2026 08:08 am
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