
बीसलपुर डेम, राजस्थान, पत्रिका फोटो
Rajasthan Drought Risk: अल-नीनों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने राजस्थान को सूखे के जोखिम वाले उन 12 राज्यों में शामिल किया है,जहां खरीफ फसलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसमें प्रदेश के जयपुर समेत 9 जिले नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, चूरू, बीकानेर, जैसलमेर, पाली और सीकर शामिल हैं।
राजस्थान के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों के कई जिले वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं, इसलिए कमजोर मानसून का असर यहां अधिक पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए कृषि विभाग को कंटीजेंसी प्लान तैयार रखना होगा।
राजस्थान के प्रमुख जलाशयों में अभी स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। केंद्रीय जल आयोग की 18 जून तक की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के सात प्रमुख जलाशयों में कुल 2.174 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध है। यह दीर्घकालिक सामान्य भंडारण 1.841 बीसीएम से 18.09 प्रतिशत अधिक है। हालांकि यह भंडारण पिछले वर्ष की समान अवधि में उपलब्ध 2.940 बीसीएम पानी से कम है।
संभावित सूखे के मद्देनजर कृषि विभाग ने जिला कृषि आकस्मिकता योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें बाजरा, मूंग, उड़द, ग्वार और तिल जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने तथा देर से बारिश की स्थिति में वैकल्पिक बुवाई रणनीति अपनाने पर जोर है।
जलाशयवार आकड़ों में बीसलपुर बांध 68.63 प्रतिशत क्षमता के साथ सबसे बेहतर स्थिति में है। सोम-कमला-अंबा जलाशय 61.38 प्रतिशत और जाखम 47.83 प्रतिशत क्षमता पर है। माही बजाज सागर और जवाई भी सामान्य से बेहतर स्थिति में बने हुए हैं। दूसरी और राणा प्रताप सागर का भंडारण पिछले वर्ष के 94.10 प्रतिशत से घटकर 34.78 प्रतिशत रह गया है, जो सबसे बड़ी गिरावट दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दो से तीन सप्ताह राजस्थान की खरीफ कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि मानसून की सक्रियता नहीं बढ़ी तो वर्षों आधारित क्षेत्रों में बुवाई प्रभावित हो सकती है और सूखे का जोखिम बढ़ सकता है।
बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। यूरिया पर्याप्त मात्रा में है। डीएपी की कमी है, उसकी अतिरिक्त मांग की गई है। जून में अच्छी बुवाई होने से कुछ राहत मिली है, लेकिन सितंबर में बारिश कम रहने की आशंका है।
Published on:
27 Jun 2026 09:20 am
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