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Damodar Dwashashi : इस व्रत में मिठाई खाने का महत्व, भोग लगाने से पूरे होते हैं मनोरथ

सनातन धर्म मेें सभी तिथियों का अलग—अलग महत्व है। इनमें द्वादशी तिथि भी शामिल है। श्रावण के महीने में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को दामोदर द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। हालांकि सावन का महीना मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है लेकिन द्वादशी विष्णुजी की पूजा के लिए फलदायी मानी जाती है। दामोदर द्वादशी पर भगवान विष्णु के भक्त व्रत रखते हैं। माना जाता है कि इससे भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं।

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Damodar Dwashashi Vrat Puja Vidhi , Vishnu Puja Ka Mahatava

Damodar Dwashashi Vrat Puja Vidhi , Vishnu Puja Ka Mahatava

जयपुर.
सनातन धर्म मेें सभी तिथियों का अलग—अलग महत्व है। इनमें द्वादशी तिथि भी शामिल है। श्रावण के महीने में शुक्ल पक्ष की द्वादशी को दामोदर द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। हालांकि सावन का महीना मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है लेकिन द्वादशी विष्णुजी की पूजा के लिए फलदायी मानी जाती है। दामोदर द्वादशी पर भगवान विष्णु के भक्त व्रत रखते हैं। माना जाता है कि इससे भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि भगवान विष्णु के कई नामों में से एक दामोदर भी है। दामोदर द्वादशी के एक दिन पहले ही एकादशी तिथि भी भगवान विष्णु को भी समर्पित है। इस दिन को पवित्रा एकादशी या पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी व्रत करने वाले भक्त द्वादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद भगवान शिव को भोग लगाकर इस प्रसाद से अपना उपवास तोड़ते हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार दामोदर द्वादशी के दिन भी विष्णुजी की पूजा विधि विधान से करना चाहिए। इस दिन उपवास रखने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं। दामोदर द्वादशी के व्रत की सबसे खास बात यह है कि इस दिन उपवास तोड़ने के बाद मीठा खाना व खिलाना बहुत शुभ माना गया है। जरूरतमंदों को दान के रूप में कपड़े और अनाज देने का भी महत्व है। इससे व्रत रखनेवालों को चमत्कारिक लाभ मिलते हैं।