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Delhi-Mumbai Expressway : दौसा में 8 लोगों की मौत के बाद ‘एक्शन’, राजस्थान सरकार के 10 बड़े फैसले- CS की ‘लास्ट वार्निंग’    

Delhi-Mumbai Expressway पर Dausa सड़क हादसे के बाद एक्शन में राजस्थान सरकार। CS V Srinivas ने ली हाई-लेवल मीटिंग, दिए कड़े निर्देश।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 3 Jul 2026, 11:02 AM IST

Delhi Mumbai Expressway Dausa Accident Meeting CS V Srinivas Action Plan

दौसा में भीषण सड़क हादसे की तस्वीर

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दौसा जिले के पास हुए भीषण और दर्दनाक सड़क हादसे ने राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता को झकझोर कर रख दिया है। इस दिल दहला देने वाली घटना में 8 लोगों की मौत के बाद राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शासन सचिवालय में एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग ली। राज्य स्तरीय स्पेशल इंस्पेक्शन टीम द्वारा ग्राउंड जीरो का दौरा करने के बाद जो चौंकाने वाले तथ्य और विश्लेषण रिपोर्ट सामने आए हैं, उसकी समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने सभी संबंधित सरकारी विभागों को दो टूक शब्दों में कहा कि यह भयानक दुर्घटना महकमे के लिए एक गंभीर 'वॉर्निंग बेल' है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान की सड़कों पर किसी भी नागरिक के अमूल्य जीवन की बलि चढ़ना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार का एकमात्र लक्ष्य 'जीरो फेटेलिटी' (सड़क हादसों में शून्य जनहानि) को हासिल करना है।

हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग : 10 बड़े फैसले

1. बस और ट्रेलर की कुंडली खंगालने के आदेश

मुख्य सचिव ने बैठक में साफ निर्देश दिए कि हादसे के शिकार हुए बस और ट्रेलर दोनों की पूरी पृष्ठभूमि की गहराई से पड़ताल की जाए। इसमें वाहनों का रजिस्ट्रेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस स्टेटस और सबसे महत्वपूर्ण बात कि उन पर पहले से कितने चालान पेंडिंग थे, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

2. दूसरे राज्यों से होगा को-ऑर्डिनेशन

हाईवे पर दूसरे राज्यों के वाहन भी बड़ी संख्या में चलते हैं, इसलिए बाहरी राज्यों के परिवहन विभागों से रियल-टाइम को-ऑर्डिनेशन स्थापित करके वाहन मालिकों और ड्राइवरों की पूरी हिस्ट्री निकाली जा रही है। बस की बॉडी की संरचनात्मक सुरक्षा, उसमें अचानक आग लगने के सटीक वैज्ञानिक कारणों और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जांच रिपोर्ट को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है।

3. सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने दुर्घटना स्थल पर लगे सीसीटीवी (CCTV) और पीटीजेड (PTZ) कैमरों की लाइव फुटेज का खुद बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने हादसे के वक्त की परिस्थितियों जैसे ट्रेलर की विजिबिलिटी, लेन ड्राइविंग के नियमों का उल्लंघन, रात्रिकालीन विजिबिलिटी (रात का अंधेरा और कोहरा), रिफ्लेक्टर टेप की स्थिति और मार्ग संकेतकों की गहन समीक्षा की। उन्होंने पाया कि एक्सप्रेस-वे के ट्रम्पेट इंटरचेंज पर भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के तय मानकों के अनुसार साइनेज व्यवस्था में क्या कमियां थीं।

4. डिजाइन और विजिबिलिटी की होगी री-चेकिंग

अब निर्देश दिए गए हैं कि सभी नेशनल हाईवे पर किसी भी खतरनाक मोड़ से पर्याप्त दूरी पहले ही बहुत बड़े और बिल्कुल स्पष्ट साइनेज बोर्ड लगाए जाएंगे और ब्लैक स्पॉट्स पर रोशनी के लिए अतिरिक्त लाइट लगाई जाएगी।

5. रिस्पॉन्स टाइम की वैज्ञानिक समीक्षा

हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे पुलिस दल, एनएचएआई (NHAI) कंट्रोल सेंटर, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों के काम शुरू करने के समय का पूरा टाइम-मैपिंग डेटा खंगाला गया। घायलों को घटनास्थल से उठाकर नजदीकी ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाने में कितने मिनट लगे और भौगोलिक दूरी के कारण इलाज में क्या देरी हुई, इसका वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।

6. एडवांस लाइफ सपोर्ट से लैस होंगी एम्बुलेंस

मुख्य सचिव ने कहा कि हादसे को रोकना जितना जरूरी है, हादसे के बाद घायल की जान बचाना भी उतना ही बड़ा काम है। इसलिए अब नेशनल हाईवे पर चल रही बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस को चरणबद्ध तरीके से 'एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस' में अपग्रेड किया जाएगा ताकि गंभीर मरीज को मौके पर ही वेंटिलेटर जैसी जीवनरक्षक सुविधाएं मिल सकें।

7. अतिक्रमण के खिलाफ विशेष महा-अभियान

हाईवे पर होने वाले हादसों की एक बड़ी वजह अवैध रूप से खड़े वाहन और ढाबों के बाहर का अतिक्रमण है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव ने पूरे राजस्थान के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ा राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रत्येक जिले में गठित 'सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स' के अध्यक्ष के रूप में जिला कलेक्टर खुद इसकी नियमित मॉनिटरिंग करेंगे। हाईवे किनारे बने अवैध पार्किंग स्थलों और अवैध कटों को चिह्नित कर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरी तरह से ब्लॉक और ध्वस्त किया जाएगा।

8. बिना रिफ्लेक्टर वाहनों पर लगेगा भारी जुर्माना

परिवहन विभाग को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे हाईवे पर दौड़ने वाले सभी भारी और वाणिज्यिक वाहनों में रिफ्लेक्टर टेप की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित कराने के लिए एक बड़ा चेकिंग अभियान शुरू करें। जिन वाहनों में रिफ्लेक्टर या तय सुरक्षा मानक नहीं मिलेंगे, उनके खिलाफ भारी चालान और ब्लैकलिस्ट करने जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

9. लंबे समय से चालान पेंडिंग, तो धरे जाएंगे !

जिन गाड़ियों पर वाहन पोर्टल पर लंबे समय से अधिक चालान पेंडिंग हैं, उन्हें हाईवे पर चढ़ने से पहले ही डिटेन करने की कार्रवाई करने की रणनीति बनाई गई है।

10. एक्सप्रेस-वे पर बनेंगे विश्राम गृह

लगातार ड्राइविंग के कारण होने वाली थकान और नींद की झपकी को सड़क हादसों का मुख्य विलेन माना गया है। इससे निपटने के लिए मुख्य सचिव ने एक्सप्रेस-वे पर वे-साइड एमेनिटीज के तहत ट्रक और बस ड्राइवरों के लिए विशेष विश्राम गृह और डॉर्मिटरी सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही, हाईवे पर चालकों के लिए बेहद किफायती दरों पर शुद्ध भोजन और रेस्ट एरिया की व्यवस्था की जाएगी ताकि लंबी दूरी के ड्राइवर पर्याप्त आराम कर सकें और अपनी एकाग्रता न खोएं।

सड़क की सतह में मौजूद असमानताओं (सड़क के उतार-चढ़ाव) को ठीक करने और ड्राइवरों को अलर्ट रखने के लिए उपयुक्त जगहों पर रम्बल स्ट्रिप्स और इमरजेंसी कॉल बॉक्स की कार्यशीलता को भी दुरुस्त किया जाएगा।