
जयपुर. राजधानी का परकोटा क्षेत्र धीरे-धीरे व्यावसायिक गतिवधियों का केंद्र बन गया। अब हालत यह है कि बाजारों में जगह नहीं बची तो गलियों में हवेलियों को तोड़कर कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। पिछले बीस वर्ष में 500 से अधिक कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए और इनमें सैकड़ों दुकानें बनी हैं। अब इन दुकानों में रोज हजारों ग्राहक आते हैं। इसी का परिणाम है कि मुख्य बाजारों से लेकर गलियों में वाहन खड़े रहते हैं और लोगों को निकलने के लिए भी जगह नहीं बचती। बीते 20 वर्षों में निगम में जो भी अधिकारी और कर्मचारी रहे, उन्होंने अवैध रूप से कॉम्प्लेक्स बनवाकर खूब चांदी कूटी। ऐतिहासिक महत्व वाली इमारतों को ध्वस्त कर नए निर्माण होने दिए।
निगम देता आवासीय निर्माण की अनुमति
-20 दिसम्बर, 2020 को स्वायत्त शासन विभाग ने एक आदेश जारी किया था, उसके आधार पर महापौर ज्योति खंडेलवाल ने एक सूचना प्रकाशित की थी। जिसमें बताया था कि नगर निगम केवल आवासीय निर्माण की अनुमति देता है।
मेट्रो भर रही रफ्तार, परेशान कर रहीं लो-फ्लोर और ई-रिक्शा
-पहले परकोटे के बाहर तक ही मेट्रो का संचालन होता था। इसके बाद परकोटे में भूमिगत मेट्रो का संचालन शुरू हुआ। छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ पर मेट्रो के आने से यात्री भार भी 50 हजार के पार हो चुका है, लेकिन सड़कों पर अब भी भारी भरकम लो फ्लोर बसें दौड़ रही हैं। अव्यवस्थित ई-रिक्शा भी जाम का बड़ा कारण हैं। इनको व्यवस्थित करने की कोई भी योजना मूर्तरूप नहीं ले पा रही है। पूरे परकोटे में ई-रिक्शा की वजह से जाम लगता है।
किसी का नहीं है कोई ध्यान
-वाहनों को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी हैरिटेज नगर निगम और यातायात पुलिस की है, लेकिन दोनों में से कोई भी ध्यान नहीं देता है।
-विदेशी सैलानी जब गुलाबी नगरी घूमने आते हैं तो ऐतिहासिक इमारतें देखकर तो वाह-वाह करते हैं, लेकिन जब जाम में फंसते हैं तो आह भरते हुए नजर आते हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर भी निगम चुप
-करीब आठ वर्ष पहले हाईकोर्ट ने परकोटा क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर एक सुनवाई में तीन सूचियां जारी की थीं। इसमें 19 इमारतों को पूर्ण रूप से अवैध माना था। मई में इन इमारतों को नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन फिर निगम ने चुप्पी साध ली। द्वितीय चरण में 12 और तीसरे चरण में 112 इमारतों पर कार्रवाई होनी है।
Published on:
10 Oct 2023 12:34 am
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