
जयपुर। सेवारत चिकित्सकों की चल रही हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही। वहीं सरकार और चिकित्सकों के बीच सुलह का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के मंत्री कालीचरण सराफ पूर्व में हुए समझौतों की पालना पूरी किए जाने का दावा कर रहे है, लेकिन चिकित्सक संघ प्रदेशाध्यक्ष समेत 12 डॉक्टर्स के तबादले निरस्त करने की मांग को लेकर अड़ा हुआ है। फिलहाल इस अड़ाअड़ी में मरीजों की जान सांसत में है। लगातार प्रदेश में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ की मानें तो उन्होंने पूर्व में हुए समझौतों का पालन कर दिया है, अब चिकित्सकों को हड़ताल पर बने रहने का कोई कारण नहीं बचता है। जबकि चिकित्सक संघ के प्रदेशाध्यक्ष लगातार सरकार पर समझौतों को लागू नहीं करने समेत कुछ नहीं मांगे भी शामिल करते हुए सरकार से दखल की मांग कर रहे है। उनका कहना है कि सरकार ने हड़ताल के दौरान जो 17 सीसीए और 16 सीसीए के नोटिस दिए है उनको वापिस ले। जो 12 तबादला किए गए उन्हें निरस्त करें। वहीं एकल पारी में सरकार शीघ्र निर्णय करें।
वहीं प्रदेश के हडताली डॉक्टरों और चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ के बीच एक बार फिर जुबानी जंग शुरू हेा गई है। सेवारत चिकित्सक संघ की ओर से उनके वकील ने एक प्रेसवार्ता रखकर सरकार पर आरोप लगाया है कि डॉक्टर्स काम पर लौटना चाहते है, लेकिन सरकार ने उनको गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छोड़ रखी है। जब तक सरकार रेस्मा नहीं हटाती वार्ता कैसे हो सकती है। इसलिए सरकार पहले रेस्मा हटाए उसके बाद वार्ता का रास्ता खोले। दूसरी ओर हड़ताली डॉक्टर्स के दबाव के चलते राजधानी के जयपुरिया, कांवटिया, सेठी कॉलोनी समेत अन्य अस्पतालों के चिकित्सक भी हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हे। उधर शुक्रवार को सेवारत चिकित्सकों के नेताओं के बयान के बाद आज सुबह चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने बयान जारी कर कहा है डयूटी ज्वाईनिंग करने में किसी भी तरह का भय नहीं है। हड़ताली सेवारत चिकित्सक ही चिकित्सकों में भय का माहौल पैदा कर डयूटी पर आने से रोक रहे है। चिकित्सकों की अधिकांश मांगे मान ली गई है।
कहीं सुधरी व्यवस्था तो कहीं बिगड़े हालात -
चिकित्सकों की दूसरी बार हुई हड़ताल में राजधानी के अधिकतर चिकित्सक संघ से साथ नहीं गए। उन्होंने मरीजों को देखने और अस्पतालों का यथावत कार्य बरकरार रखा, जबकि दूसरे जिलों में अस्पतालों के हाल बेहाल है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सेवारत चिकित्सक और रेजीडेंटस के नहीं होने से सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्थाएं चरमरा गई है और मरीजों को अब निजी अस्पतालों में जाकर इलाज कराना मजबूरी हो गया है। सर्दी के कारण बुखार और स्वाइन फ्लू की आंशका को देखते हुए निजी अस्पताल मरीजों से भर गए है। उधर राजधानी जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुडे सभी अस्पतालों में बीते आठ दिन से चिकित्सा व्यवस्थाएं पूरी तरह से बेपटरी हैं और अब आउटडोर से लेकर इनडोर तक मरीज आधे से भी कम रह गए हैं प्रतिदिन बडे आॅपरेशन टाले जा रहे है। रेजीडेंट नहीं होने से सबसे ज्यादा खराब हाल वार्डों और आईसीयू में है जहां सुबह से शाम तक मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते रहते है। वहीं राजधानी जयपुर में लगभग ३५ से ज्यादा डिस्पेंसरियां हैं यहां भी सेवारत चिकित्सक नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड रहा हैं।
Published on:
23 Dec 2017 02:23 pm
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