
जयपुर। इस साल राजस्थान में चांदी की खपत बड़े स्तर पर हो रही है। आंकड़ों के अनुसार पिछले दस साल में चांदी की खपत दोगुना हो गई है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि किसानों के लिए चांदी के गहने पसंदीदा निवेश विकल्प है। एेसे में यह वर्ग पिछले एक साल से चांदी में जमकर निवेश कर रहा है। दरअसल सोने की कीमतें गत दो वर्षों से 30 हजार रुपए प्रति दस ग्राम के आसपास घूम रही है। वहीं चांदी 2017 में 35 हजार थी, जो अब बढक़र 40 हजार रुपए प्रति किलो के पार जा चुकी है।
सोने की मांग घटी
भारत में सोने की ज्वैलरी की मांग में 12 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है जो 10 साल में किसी तिमाही में तीसरी सबसे कमजोर मांग है।
यह है आखिरी मंदी
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि चांदी में यह आखिरी मंदी है, अब चांदी में दिवाली तक तेजी के आसार है। चांदी हाजिर दिवाली तक 50 हजारी हो सकती है।
चांदी की बढ़ती मांग
राजस्थान में 2008 के दौरान आभूषण विनिर्माण के लिए 50 टन चांदी का इस्तेमाल किया गया था, जबकि 2017 में गहने बनाने में 105 टन चांदी का प्रयोग किया गया।
जब किसानों के पास नकदी होती है, तो खरीदारी के लिए चांदी
उनकी पसंदीदा परिसंपत्ति रहती है और जरूरत पडऩे पर इसे बेच दिया जाता है। जहां तक आभूषण की बात है, तो चांदी की ग्रामीण मांग का एक बड़ा हिस्सा पायल बनवाने के लिए होता है, जबकि चांदी के बर्तनों में पूजा के सामान और मूर्तियों की बड़ी हिस्सेदारी होती है।
सोना एक बार खरीदे जाने के बाद आमतौर पर बेचा नहीं जाता है, लेकिन जब किसानों के पास नकदी होती है, तो वे चांदी खरीदते हैं और अगले सीजन में बीजों तथा उर्वरकों की खरीदारी के लिए बेचतेे हैं।
कैलाश मित्तल, अध्यक्ष, सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष
Published on:
09 Jul 2018 05:29 pm
