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Jaipur: ड्राइविंग लाइसेंस हुआ महंगा; ऑटोमेटेड ट्रैक पर लाइसेंस मिलना मुश्किल और महंगा, जानिए नया सिस्टम

Driving Test Charges: राजस्थान में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया आवेदकों के लिए ही महंगी साबित हो रही है। विभाग में ट्रायल के लिए शुरू किए गए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक आवेदकों की जेब हल्की करने का जरिया बन गए हैं।
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ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, पत्रिका फोटो

ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, पत्रिका फोटो

Driving Test Charges: राजस्थान में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया आवेदकों के लिए ही महंगी साबित हो रही है। विभाग में ट्रायल के लिए शुरू किए गए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक आवेदकों की जेब हल्की करने का जरिया बन गए हैं। परिवहन विभाग कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) के तहत बनाए इन ट्रैकों पर ट्रायल के लिए आवेदकों से 250 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहा है जिसके कारण ड्राइविंग लाइसेंस लेना आवेदकों के लिए महंगा हो गया है।

प्रदेश के आरटीओ और डीटीओ कार्यालयों में तकनीक आधारित ड्राइविंग टेस्ट लागू होने के बाद दुपहिया और चौपहिया वाहनों के लाइसेंस की फीस 800 रुपए से बढ़कर 1050 रुपए हो गई है। इसमें दुपहिया के लिए 100 रुपए और चौपहिया के लिए 150 रुपए की अतिरिक्त टेस्ट फीस शामिल है। 250 रुपए का अतिरिक्त भार सीधे आवेदकों पर डाला गया है।

इन जिलों में भी लागू होगी व्यवस्था

यह व्यवस्था जयपुर-प्रथम, भरतपुर, सीकर, जोधपुर, उदयपुर, चूरू और राजसमंद में लागू हो चुकी है, जहां रोजाना करीब 550 ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। अतिरिक्त शुल्क के नाम पर आवेदकों से खुलेआम वसूली हो रही है। आगामी समय में हनुमानगढ़, अलवर, चित्तौड़गढ़, बारां, बीकानेर, धौलपुर, डीडवाना, कोटा, झालावाड़ और डूंगरपुर सहित अन्य जिलों में भी ऑटोमेटेड सिस्टम लागू करने की योजना है।

जयपुर में 2 कार्यालयों में फीस में अंतर

जगतपुरा में जहां लाइसेंस शुल्क में 250 रुपए तक बढ़ोतरी की गई है जबकि विद्याधर नगर स्थित परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदकों से पुराना शुल्क ही वसूल किया जा रहा है। इसके पीछे विभाग विद्याधर नगर कार्यालय में ऑटोमेटेड सिस्टमयुक्त ट्रैक नहीं होने का तर्क दे रहा है। विद्याधर नगर कार्यालय के लिए ऑनलाइन आवेदन करने पर भी आवेदकों को जगतपुरा कार्यालय ही भेजा जा रहा है।

ट्रायल पर डिजिटल निगरानी

परिवहन विभाग का कहना है कि ऑटोमेटेड ट्रैक से ड्राइविंग टेस्ट पूरी तरह कैमरा और सेंसर आधारित हो गया है। वाहन की मूवमेंट, लाइन क्रॉसिंग, ब्रेकिंग और मोड़ जैसे सभी पहलुओं की निगरानी डिजिटल सिस्टम करता है और उसी आधार पर रिजल्ट जारी होता है। ट्रैक पर सख्ती के चलते पहले से ही ट्रायल देने वालों की संख्या और सफल आवेदकों की गिनती काफी कम हो गई है।

विभाग नहीं दे रहा जवाब

आवेदकों का कहना है कि जब ट्रैक CSR के तहत तैयार किए गए हैं, तो आम लोगों से अतिरिक्त शुल्क वसूलना गलत है। जगतपुरा कार्यालय में लाइसेंस बनवाने पर 250 रुपए अतिरिक्त शुल्क आवेदकों से वसूला जा रहा है। मामले में पूछताछ करने पर भी आवेदकों को संतोषजनक जवाब विभाग नहीं दे रहा है।

जिम्मेदार बोले, मुख्यालय से तय होते नियम

मामले में जगतपुरा कार्यालय में तैनात अधिकारियों का कहना है कि यह बात सही है कि ट्रायल ट्रैक सीएसआर के तहत दुरुस्त किया गया है लेकिन फीस बढ़ाने का मामला मुख्यालय स्तर पर ही तय हुआ है। इस बारे में ज्यादा जानकारी तो विभाग के आलाधिकारी ही दे सकते हैं।

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