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ई-ऑफिस : रेलवे की अभिनव पहल

कागज के साथराजस्व की भी बचतअब फाइल नहीं होती गुमकाम में आई पारदर्शितापर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया एक कदम

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जयपुर

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Rakhi Hajela

May 30, 2021

ई-ऑफिस : रेलवे की अभिनव पहल

ई-ऑफिस : रेलवे की अभिनव पहल



जयपुर, 30 मई।
कागज बचाकर पेड़ों को सरंक्षित करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे ने तकरीबन तीन साल पहले एक अभिनव पहल की थी जो आज साकार हो चुकी है। यह पहल थी सभी फाइलों और पत्रों का आदान प्रदान ई ऑफिस यानी इलेक्ट्रॉनिक रूप से करना।
एम्पलाइज
ई ऑफिस की परिकल्पना को साकार करने के लिए विभाग की ओर से एम्पलॉइज को ट्रेनिंग दी गई है। रेलटेल की मदद से 1528 कार्मिकों को ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही उत्तर पश्चिम रेलवे में ई ऑफिस पर 54 हजार इलेक्ट्रॉनिक फाइल अपलोड की जा चुकी है साथ ही चार लाख डॉक्यूमेंट्स को भी इस पर प्रोसेस किया जा चुका है। पुराने रिकॉर्ड को भी ऑनलाइन ई ऑफिस प्लेटफार्म पर लाने के लिए इनका डिजिटाइजेशन कर उन्हें स्कैन किया जा चुका है।
2018 में हुई थी शुरुआत
गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने चरणबद्ध तरीके से 2018 में ईऑफिस का शुरुआत रेलटेल के सहयोग से की थी। उत्तर पश्चिम रेलवे ने 24 मार्च 2019 को प्रधान कार्यालय जयपुर और 23 अप्रेल 2019 को जोधपुर मंडल में ईऑफिस का आरंभ किया और अब पूरे उत्तर पश्चिम रेलवे पर ई-ऑफिस का इम्प्लीमेंटेशन का कम पूरा हो चुका है।
यह है ई-ऑफिस का फायदा
: रेलवे के राजस्व की हो रही बचत
: पारदर्शिता: फाइलों को ट्रेक किया जा सकता हे उनकी स्थिति हर समय पता की जा सकती है।
: जवाबदेही: किए गए कार्य की जिम्मेदारी की निगरानी करना आसान है।
: डेटा सुरक्षा और डेटा इग्नेग्रिटी संभव।
: कार्मिकों के समय और उनकी मेहनत बचेगी।
: फाइलें नहीं होंगी गुम।
: ऑफिस में किए गए कार्यों की मॉनिटरिंग ईफाइल मिसलेनियस रिपोर्ट से पता करना संभव।
इनका कहना है,
उत्तर पश्चिम रेलवे में हमने ई ऑफिस को लागू कर दिया है। हम इसका उपयोग कर अब कागज की तो बचत कर ही रहे हैं साथ ही रेल के राजस्व में भी बचत हो रही है। साथ ही पेड़ों को भी नया जीवन मिल रहा है। इसस प्रोसेस में फाइलों के गुम होने का प्रतिशत जीरो है।
कर्नल शशि किरण,
वरिष्ठ जन सम्पर्क अधिकारी
उत्तर पश्चिम रेलवे।