
जयपुर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के पक्ष में दिए गए बयान के बाद राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह (Rajasthan Governor Kalyan Singh) मुश्किल में पड़ सकते हैं। दरअसल, कल्याण सिंह के बयान को चुनाव आयोग (Election Commission) ने आचार संहिता (Code Of Conduct) का उल्लंघन मानते हुए गंभीरता से लिया है। जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने इस मामले को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) के संज्ञान में लाने का मन बनाया है। इसके लिए बाकायदा एक पत्राचार करते हुए राष्ट्रपति को अवगत करवाए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि इस बारे में अभी तक किसी भी अधिकारी ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
दरअसल, पिछले दिनों राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ दौरे के दौरान पीएम मोदी को लेकर एक ऐसा बयान दिया जो सुर्खियां बन गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने कल्याण सिंह के इस बयान का वीडियो और तमाम मीडिया रिपोर्ट्स चुनाव आयोग को भेजी थीं।
अब माना जा रहा है कि यदि राष्ट्रपति निर्देशित करते हैं तो राज्यपाल को पद भी छोड़ना पड़ सकता है। राज्यपाल का संवैधानिक पद होने की वजह से चुनाव आयोग सीधे तौर पर राजयपाल पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।
जानें क्या है मामला
राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह अलीगढ़ दौरे के दौरान मैरिस रोड स्थित अपने आवास राज पैलेस पर रुके थे। इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मौजूदा सांसद सतीश गौतम को अलीगढ़ से प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। सतीश गौतम को टिकट दिए जाने का अलीगढ़ में जमकर विरोध हुआ। नाराज़ लोग कल्याण सिंह के आवास राज पैलेस पर पहुंच गए, जहां उन्होंने अपनी नाराजगी जताई।
वहीं दूसरे दिन कल्याण सिंह जब शहर में निकले तो लोगों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और एक बार फिर सतीश गौतम को टिकट दिए जाने का विरोध किया। इस पर कल्याण सिंह ने लोगों को समझाते हुए कहा कि नेतृत्व का निर्णय सर्वमान्य होना चाहिए। मोदी जी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाना है इसलिए नाराजगी छोड़ दो।
कल्याण सिंह का यह वीडियो वायरल हो गया। सवाल उठे कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए कल्याण सिंह मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की अपील कैसे कर सकते हैं। मामले में जिला प्रशासन ने चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट भेज भेजी।
सीएम गहलोत ने भी की थी बयान की निंदा
राज्यपाल कल्याण सिंह के बयान पर सीएम अशोक गहलोत की भी प्रतिक्रिया आई थी। उन्होंने उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था, ''राज्यपाल का पद एक संवैधानिक पद होता है। एक लोकतंत्र में राज्यपाल से निष्पक्षता और सभी पार्टियों से दूरी बरकरार रखने की उम्मीद की जाती है।''
राज्यपाल कल्याण सिंह को हटाए जाने की उठी मांग
संवैधानिक पद पर रहते हुए राज्यपाल कल्याण सिंह का आचार संहिता के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में वोट का समर्थन जाहिर करने के बाद विवाद बढ़ गया। जन सरोकार से जुडे मुद्दों को लेकर सक्रिय राजस्थान हाईकोर्ट के वकील ने उनकी बर्खास्तगी के लिए राष्ट्रपति से मांग की।
अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने राज्यपाल सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में बोलने के मामले को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि राज्यपाल कल्याण सिंह मौजूदा पद पर नियुक्ति से पहले भाजपा के सदस्य रहे हैं।
राज्यपाल नियुक्त होने पर कोई भी व्यक्ति किसी पार्टी का सदस्य नहीं रह सकता और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का पक्ष ले सकता है। इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक रूप से उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ में कहा कि हम सब भाजपा के कार्यकर्ता हैं इसलिए भाजपा की जीत चाहते हैं और मोदी जी एक बार फिर प्रधानमंत्री बनें। भंडारी ने पत्र में कहा है कि राज्यपाल रहते हुए दिया गया यह बयान संविधान की भावना के खिलाफ है, इसलिए उन्हें तुरन्त पद से बर्खास्त किया जाए।
Published on:
02 Apr 2019 09:21 am
