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राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में ‘युवा जोश’ की एंट्री, 2024 बैच के IAS संभालेंगे SDM का ज़िम्मा, जानें कब होगी पहली तैनाती?

जयपुर के एचसीएम रीपा (HCM RIPA) में 2024 बैच के प्रोबेशनर आईएएस अधिकारियों का विदाई सत्र आयोजित किया गया, जहाँ मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने उन्हें 'फील्ड' की बारीकियों और संवेदनशील निर्णय लेने का मंत्र दिया।

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प्रोबेशनर्स आईएएस अधिकारियों का विदाई सत्र

प्रोबेशनर्स आईएएस अधिकारियों का विदाई सत्र

राजस्थान के प्रशासनिक बेड़े में जल्द ही नई सोच और नवाचार का समावेश होने जा रहा है। जयपुर स्थित 'हरीशचन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान' (एचसीएम रीपा) में शनिवार को वर्ष 2024 बैच के प्रोबेशनर्स आईएएस अधिकारियों का विदाई सत्र संपन्न हुआ। यह विदाई महज एक रस्म नहीं थी, बल्कि राजस्थान की 'ग्राउंड रियलिटी' को समझकर लौटे इन युवा अधिकारियों के लिए भविष्य की चुनौतियों का शंखनाद था।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इन भावी नीति-निर्धारकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अब प्रशासन केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का नाम है।

अगस्त 2026: जब 'SDM' की कुर्सी पर बैठेंगे ये युवा चेहरे

मुख्य सचिव ने बताया कि ये अधिकारी अब मसूरी (LBSNAA) में अपने प्रशिक्षण के अंतिम चरण में प्रवेश करेंगे।

  • महत्वपूर्ण समय: आगामी चार महीने इनके लिए प्रशासनिक बारीकियों को सीखने का अंतिम अवसर होंगे।
  • सीधी तैनाती: अगस्त 2026 में ये सभी अधिकारी राजस्थान के विभिन्न जिलों में उपखंड अधिकारी (SDM) के रूप में अपना पहला स्वतंत्र कार्यभार संभालेंगे।
  • CS का मंत्र: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि प्रशिक्षण ही कार्यकुशलता और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की आधारशिला है।

क्षेत्रीय चुनौतियों का 'प्रत्यक्ष अनुभव'

विदाई सत्र के दौरान 2024 बैच के अधिकारियों ने अपने जिला प्रशिक्षण के अनुभवों को बेहद रोमांचक बताया। उन्होंने साझा किया कि:

  1. धरातल की हकीकत: उन्होंने समझा कि कैसे एक सरकारी आदेश आम आदमी के जीवन को प्रभावित करता है।
  2. समस्या निवारण: आमजन की समस्याओं के मौके पर निस्तारण का प्रत्यक्ष अनुभव अब उन्हें बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा।
  3. वरिष्ठों का मार्गदर्शन: कार्यक्रम में वरिष्ठ आईएएस हेमंत गेरा, अम्बरीष कुमार और समित शर्मा ने भी युवा अधिकारियों को आगामी भूमिकाओं के लिए तैयार रहने के गुर सिखाए।

अब मसूरी के लिए प्रस्थान

प्रशिक्षण के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को पूरा करने के बाद, यह बैच अब मसूरी के लिए रवाना होगा। वहाँ से लौटने के बाद जब ये अधिकारी राजस्थान के उपखंडों की कमान संभालेंगे, तब प्रदेश को एक नई प्रशासनिक दृष्टि मिलने की उम्मीद है।

प्रशिक्षण के इन पहलुओं पर जोर

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA), मसूरी में होने वाला यह 4 महीने का 'फेज-2' प्रशिक्षण किसी भी आईएएस अधिकारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। यहाँ उन्हें किताबी ज्ञान से ऊपर उठकर एक 'लीडर' और 'निर्णायक' बनने की ट्रेनिंग दी जाती है।

मुख्य रूप से प्रशिक्षण के इन पहलुओं पर जोर रहता है:

  • क्षेत्रीय अनुभवों का विश्लेषण: प्रोबेशनर्स ने अपने जिला प्रशिक्षण (Field Training) के दौरान जो कुछ भी सीखा और जिन समस्याओं का सामना किया, यहाँ उनका बारीकी से विश्लेषण किया जाता है। वे एक-दूसरे के साथ केस स्टडीज साझा करते हैं।
  • प्रशासनिक कौशल और कानून: लैंड रेवेन्यू, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC), और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर उनकी पकड़ को और मजबूत किया जाता है, क्योंकि अगस्त में वे SDM के रूप में मजिस्ट्रेट की शक्तियां संभालेंगे।
  • संवेदनशीलता और एथिक्स: मुख्य सचिव ने जो 'संवेदनशीलता' का मंत्र दिया, वह यहाँ सिखाया जाता है। कठिन परिस्थितियों में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष निर्णय कैसे लें और समाज के सबसे निचले तबके तक सरकारी योजना कैसे पहुँचाएँ, इसकी ट्रेनिंग दी जाती है।
  • लीडरशिप और टीम मैनेजमेंट: एक अधिकारी को पुलिस, राजनेताओं और आम जनता के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होता है। इसके लिए उन्हें सॉफ्ट स्किल्स और मैनेजमेंट की विशेष कक्षाएं दी जाती हैं।

RIPA बना देश का मॉडल: डीजी श्रेया गुहा ने गिनाईं उपलब्धियां

संस्थान की महानिदेशक श्रेया गुहा ने मुख्य सचिव को इन अधिकारियों द्वारा तैयार की गई जिला प्रशिक्षण रिपोर्ट का अवलोकन करवाया।

  • फ्लैगशिप योजनाओं पर फोकस: प्रोबेशनर्स ने राजस्थान सरकार की प्रमुख योजनाओं—जैसे चिरंजीवी, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास—के धरातल पर क्रियान्वयन को लेकर अपनी प्रस्तुतियाँ दीं।
  • नवाचार: इन रिपोर्टों में अधिकारियों ने क्षेत्रीय चुनौतियों और उनके समाधान के लिए 'डिजिटल' और 'इनोवेटिव' सुझाव दिए हैं।
  • मर्यादा का पाठ: श्रीमती गुहा ने अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए युवा आईएएस को लोक सेवा की उच्चतम मर्यादाओं को बनाए रखने की प्रेरणा दी।

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