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बारिश के बढ़ा इन बीमारियों का डर, अलर्ट मोड पर आया चिकित्सा विभाग, चलाया जा रहा अब यह अभियान

बारिश जहां राहत लेकर आई है, वहीं बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ा दिया है।

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जयपुर। बारिश जहां राहत लेकर आई है, वहीं मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ा दिया है। इन मौसमी बीमारियों पर रोकथाम के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग ने जयपुर जिले में डेंगू रोकथाम माह की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एक साथ एंटीलार्वा गतिविधियां, सर्वे, सैंपलिंग और जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे है।

सीएमएचओ जयपुर प्रथम डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि डेंगू व मलेरिया जैसे वेक्टर जनित रोगों को नियंत्रित करने के लिए जुलाई माह को हर साल "डेंगू रोकथाम माह" के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है, बुखार के रोगियों को चिह्नित कर उनके रक्त सैंपल लिए जा रहे हैं। साथ ही मच्छरों के लार्वा की पहचान कर दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।

मच्छरों के लिए बना मुफीद मौसम..

बारिश के बाद जगह-जगह जमा हुआ ठहरा पानी मच्छरों के प्रजनन का मुख्य कारण बनता है। डॉ. शेखावत के अनुसार, डेंगू का एडीज मच्छर साफ पानी में अंडे देता है और दिन के समय काटता है। वहीं मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज मच्छर गंदे और ठहरे पानी में पनपता है। ऐसे में छतों पर रखे बर्तनों, कूलरों, गमलों, टंकी आदि की नियमित सफाई अत्यंत आवश्यक है।

स्वास्थ्य विभाग की सख्ती, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही भी उजागर..

जहां स्वास्थ्य विभाग लगातार फॉगिंग, लार्वा विनाशक दवाओं का छिड़काव और जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। वहीं नगर निकायों की उदासीनता प्रभाव को सीमित कर रही है। कई स्थानों पर सीवर जाम, खुले नाले, और कूड़े के ढेरों में पानी जमा होने से मच्छर पनप रहे हैं। लोगों की शिकायत है कि कई वार्डों में सप्ताहों से फॉगिंग नहीं हुई और सफाई अभियान केवल कागजों तक सीमित है।

आमजन को भी निभानी होगी जिम्मेदारी..

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई काफी नहीं है। डेंगू और मलेरिया को हराने के लिए जन-सहभागिता जरूरी है। हर परिवार को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके घर और आसपास पानी जमा न हो। मच्छरदानी, रिपेलेंट, फुल स्लीव कपड़े और साफ-सफाई जैसे सामान्य उपायों को अपनाकर बड़ी हद तक बीमारी से बचा जा सकता है।

जागरूकता सोशल मीडिया तक..

डॉ. शेखावत ने बताया कि विभाग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक के माध्यम से भी जनजागरूकता फैला रहा है। इसके अलावा स्कूलों, आंगनबाड़ियों और मोहल्ला क्लीनिक स्तर पर भी डेंगू-मलेरिया से बचाव की जानकारी दी जा रही है।