सूत्रों के अनुसार, सहकारी समिति ने बिना टेंडर के एक फर्म को गेहूं परिवहन का काम दिया था, जिसने जुलाई से सितंबर के बीच 2 हजार क्विंटल गेहूं गायब कर दिया। जब मामला खुला, तो गायब हुआ गेहूं मिल गया, लेकिन इसके बावजूद डिपो से जिले के लिए आवंटित गेहूं का उठाव सही ढंग से नहीं हो रहा है। जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई न होने से विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।