
Rajasthan High Court Order: सांकेतिक तस्वीर-एआई जेनरेटेड
जयपुर। जिस उम्र में एक बच्चा अपने पिता की उंगली पकड़कर चलना सीखता है, उसी उम्र में उमेश सिंह ने अपने सिर से पिता का साया खो दिया था। उस वक्त वह महज ढाई साल का था। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी बुजुर्ग दादा-दादी के कंधों पर आ गई। वक्त बीतता गया, परिवार की मुश्किलें बनी रहीं और उमेश के बालिग होने का इंतजार होता रहा। अब पिता की मौत के करीब 21 साल बाद राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश से उमेश के लिए सरकारी नौकरी की उम्मीद फिर से जगी है।
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने सेंट्रल इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीईईआरआई), पिलानी को उमेश सिंह को उपयुक्त पद पर तत्काल अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश उमेश की अपील पर सुनाया।
उमेश के पिता सीईईआरआई में तकनीशियन के पद पर कार्यरत थे। नौकरी के दौरान 3 मार्च 2005 को उनका निधन हो गया। उस समय उमेश इतना छोटा था कि पिता की नौकरी या परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को समझना तो दूर, उसे अपने पिता की कमी का अर्थ भी शायद मालूम नहीं था।
पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी दादा-दादी ने संभाली। लेकिन समय के साथ दादा का भी निधन हो गया। परिवार में उमेश की पांच बहनें थीं। आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं। इनमें से एक बहन दिव्यांग है, जबकि दो बहनों का विवाह हो चुका है। परिवार की परिस्थितियों के बीच उमेश के बालिग होने के बाद अनुकंपा नियुक्ति की उम्मीद ही परिवार के लिए सहारा बनी रही।
उमेश ने बालिग होने के बाद 27 जुलाई 2020 को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। उसका कहना था कि संस्थान की ओर से उसे यह भरोसा भी दिया गया था कि बालिग होने के बाद उसकी नियुक्ति पर विचार किया जाएगा। हालांकि, संस्थान ने आवेदन को अत्यधिक देरी का आधार बताते हुए खारिज कर दिया।
संस्थान की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए 15 साल बाद विचार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया कि परिवार को पेंशन और ग्रेच्युटी मिली थी तथा पिता की मृत्यु के समय परिवार की अन्य सदस्य भी नौकरी के लिए पात्र थीं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उमेश के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि केवल तकनीकी कारणों को अनुकंपा नियुक्ति से इनकार का आधार नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करने से अनुकंपा नियुक्ति योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।
अदालत के आदेश के बाद अब उमेश को 21 साल पुराने उस इंतजार का जवाब मिलने की उम्मीद है, जो उसके पिता की मौत के साथ शुरू हुआ था। ढाई साल की उम्र में पिता को खोने वाला उमेश अब वयस्क होने के बाद अपने परिवार के लिए जिम्मेदारी संभालने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
Updated on:
26 Aug 2026 10:37 pm
Published on:
26 Aug 2026 10:37 pm
