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…मैं चुप नहीं रहूंगी: अन्याय के खिलाफ बुलंद हुई आवाज

—प्रदेश के थानों में बढ़ी महिला एफआईआर की संख्या

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women commission

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—उन्नाव और कठुआ दुष्कर्म मामलों ने धार दी महिलाओं की सोच को
—राज्य महिला आयोग ने माना कि पहले थानों में नहीं पहुंचते थे मामले
जयपुर।
मैं चुप नहीं रहूंगी...इस टाइटल के साथ 1985 में हिन्दी फिल्म आई थी, लेकिन फिल्म का ये टाइटल अब महिलाओं की अभिव्यक्ति बन गया है। अभिव्यक्ति दुष्कर्म, दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा जैसे अन्याय के विरूद्ध। दिल्ली में निर्भया कांड के बाद अन्याय के खिलाफ बुलंद हुई महिलाओं की आवाज को उन्नाव और कठुआ दुष्कर्म मामलों ने धार दे दी है। इसकी बानगी देखने को मिली है राजस्थान महिला आयोग में।


महिला उत्पीड़न के मामलों पर अकसर चर्चाएं होती है लेकिन पीड़ित महिलाएं अपनी तकलीफ को लेकर बाहर नहीं आती थी यानि कि वे ना तो पुलिस की मदद लेती और ना ही आयोग में पहुंचती। ये संख्या बहुत कम थी लेकिन आज आलम ये है कि पुलिस थानों में हजारों मामलों में महिलाओं ने एफआईआर दर्ज करवाई है। जिसे जल्द ही आंकड़ों में लिया जाएगा। आयोग की मानें तो एफआईआर की संख्या में बढोतरी का कारण महिलाओं का जागरुक होना है। पहले वो समाज और परिवार के डर से शिकायत नहीं करती थी। लेकिन अब वो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने लगी है। महिला आयोग भी महिलाओं में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहा है। बेटियों को उत्पीडन से बचाने के लिए कानून की शिक्षा दी जा रही है। इसके लिए 'विधिक जागरुकता शिविर' लगाए जा रहे है। जिसमें उन्हें उन बेसिक कानून व अधिकारों की जानकारी दी जा रही है जिसके दम पर वे अपनी पीड़ा के खिलाफ स्वयं जागरुक हो रही है। आयोग की ओर से १२ पेज की एक पुस्तक भी बनाई गई है जिसे स्कूल व कॉलेज की लड़कियों को बांटा जा रहा है।

फैक्ट फाइल—
यदि आयोग में दर्ज मामलों के आंकड़ों पर गौर करें तो 2015 में सुमन शर्मा के पद संभालने पर 20 हजार 583 पेंडेंसी थी। पदभार से अब तक 10 हजार 607 नए मामले दर्ज हुए है। यानि अब तक कुल 31 हजार 190 मामलों में—से 19 हजार 865 मामलों की सुनवाई हुई और 11 हजार 335 पर सुनवाई होना बाकी है। इसमें घरेलू हिंसा, रेप, पति—पत्नी का आपसी विवाद आदि मामले शामिल है।
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इनका कहना हैं—
—बेटियों को जागरुक करने के लिए आयोग की चौतरफा कोशिश चल रही है। इसका नतीजा ये है कि थानों में पहले जहां शिकायते दर्ज नहीं होती थी आज दर्ज होने लगी है। आज एफआईआर की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे अधिक सोचने वाली बात है कि महिलाएं और बेटियां अब चुप नहीं बैठ रही। वे आगे आकर अपने लिए लड़ रही है। जिस पर अब कार्रवाई भी हो रही है।
सुमन शर्मा, अध्यक्ष
राज्य महिला आयोग