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एक अरब भारतीयों की पहचान अब सुपर-सुरक्षित, एक ही व्यक्ति के नाम पर दो आधार बनना लगभग असंभव

UIDAI AI Shield: आधार की 'अदृश्य ढाल' तैयार! AI ने धोखाधड़ी को जड़ से खत्म किया। राजस्थान में आधार के पकड़े कई फर्जी मामले।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Feb 22, 2026

मोहित शर्मा.

Aadhaar Security: जयपुर। आधार कार्ड अब और भी मजबूत और सुरक्षित हो गया है। UIDAI ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ताकत से एक नई 'अदृश्य ढाल' खड़ी कर दी है, जो फर्जी आधार बनाने और दस्तावेजों की छेड़छाड़ को शुरू से ही रोक देती है। यह दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक सिस्टम है, जो हर नए आधार को पूरी डेटाबेस से मिलाकर चेक करता है और धोखेबाजों को मुंहतोड़ जवाब देता है। Azadi Ka Amrit Mahotsav के तहत यह कदम भारत के डिजिटल सुरक्षा मिशन को नई ऊंचाई दे रहा है।यह 'अदृश्य ढाल' सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि हर भारतीय की सुरक्षा का नया अध्याय है। AI की मदद से भारत अब डिजिटल दुनिया में और मजबूत कदम बढ़ा रहा है – फर्जीवाड़े का खेल खत्म, भरोसा अब अटूट।

AI से अरबों गणनाएं, फर्जीवाड़ा नामुमकिन

UIDAI ने IIIT हैदराबाद के साथ मिलकर भारत में ही बने एडवांस्ड AI मॉडल तैयार किए हैं। ये मॉडल उंगलियों के निशान, चेहरे और आंखों की पुतली (आइरिस) की जांच करते हैं। NVIDIA DGX के हाई-स्पीड इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलते हुए हर नामांकन में अरबों कैलकुलेशन होती हैं। इससे एक ही व्यक्ति के नाम पर दो आधार बनना लगभग असंभव हो गया है। कई राज्यों में यह सिस्टम लागू हो चुका है और जल्द पूरे देश में फैल जाएगा।

दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक सिस्टम

UIDAI हर नए आधार को पूरे 1.3 अरब से ज्यादा रिकॉर्ड्स वाली डेटाबेस से मैच करता है। AI की मदद से यह काम सेकंडों में हो जाता है। स्वदेशी AI मॉडल और NVIDIA की पावर से यह सिस्टम तेज, सटीक और सुरक्षित है।

फर्जी दस्तावेजों पर भी लगाम

अब आधार बनवाने के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की भी AI से जांच होती है। मेटाडेटा निकालकर DigiLocker से असली स्रोत से मिलान किया जाता है। फर्जी आधार कार्ड या पुराने दस्तावेजों से धोखा देना मुश्किल हो गया है। इससे नामांकन का समय कम लगता है, सेवा बेहतर होती है और नागरिकों का भरोसा बढ़ता है।

मुख्य खासियत

  • दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक डुप्लीकेशन सिस्टम
  • स्वदेशी AI मॉडल NVIDIA DGX पर हाई-स्पीड प्रोसेसिंग
  • अरबों गणनाएं हर नामांकन में
  • फर्जी दस्तावेजों की तुरंत पकड़ DigiLocker से रीयल-टाइम सत्यापन

लाभ क्या हैं?

  • फर्जी आधार से जुड़ी धोखाधड़ी खत्म
  • आधार धारकों की सेवा तेज और भरोसेमंद
  • डिजिटल इंडिया में विश्वास बढ़ेगा
  • एक अरब से ज्यादा भारतीयों की पहचान सुरक्षित

राजस्थान में भी हुआ फर्जीवाड़ा

राजस्थान में आधार फर्जीवाड़े के कई बड़े मामले पकड़े गए। खासकर बॉर्डर इलाकों में। ये मामले UIDAI की जांच और पुलिस की कार्रवाई से सामने आए हैं। AI-सक्षम नई 'अदृश्य ढाल' से अब ऐसे फर्जीवाड़े को जड़ से रोकना आसान हो रहा है।

ये है राजस्थान के प्रमुख मामले

  • सांचौर (जालोर) में जानवरों की आंखों की पुतली और पैर के निशान से फर्जी आधार: 2024 में सांचौर (पाकिस्तान बॉर्डर के पास) में e-Mitra ऑपरेटर्स ने जानवरों की आइरिस (पुतली) और टो प्रिंट्स (पैर के निशान) का इस्तेमाल करके फर्जी आधार कार्ड बनाए।
  • मल्टी-स्टेट GST फ्रॉड में राजस्थान के आरोपी पकड़े: 2025 में 250 करोड़ के GST स्कैम में राजस्थान पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। फर्जी फर्म्स बनाने के लिए चोरी किए गए आधार, PAN और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ। ये रैकेट कई राज्यों में फैला था।
  • साइबर फ्रॉड में राजस्थान के लोगों की पहचान चोरी: 2025 में श्रीगंगानगर के एक शख्स के आधार और PAN हैक होकर करोड़ों के फ्रॉड में इस्तेमाल हुए। पुलिस ने FIR दर्ज की, लेकिन आरोपी पूरे देश में फैले थे। इसी तरह कई मामलों में राजस्थान से आधार ऑपरेटर्स की मिलीभगत पाई गई।

ये मामले दिखाते हैं कि पहले फर्जीवाड़ा कितना आसान था, लेकिन UIDAI के नए AI सिस्टम से अब डुप्लीकेशन और फर्जी दस्तावेज पकड़ना तेज हो गया है। राजस्थान जैसे संवेदनशील इलाकों में यह 'अदृश्य ढाल' राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अहम है।