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Dr. Somdev Bansal: जयपुर में गिरफ्तारी के बाद डॉक्टर सोमदेव बंसल की तबियत बिगड़ी, VIP ट्रीटमेंट पर मचा बवाल

जयपुर में निविक हॉस्पिटल के डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के बाद उन्हें एसएमएस अस्पताल में भर्ती करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि बिना सीनियर डॉक्टर की सलाह के भर्ती किया गया। जांच रिपोर्ट सामान्य आई, अब मेडिकल बोर्ड आज फैसला करेगा।

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जयपुर

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Arvind Rao

Apr 15, 2026

Jaipur Dr Somdev Bansal arrest sparks SMS Hospital admission row protocol lapse alleged board to decide today

डॉ. सोमदेव बंसल (पत्रिका फाइल फोटो)

Dr. Somdev Bansal Arrest: जयपुर: निविक हॉस्पिटल के डॉक्टर सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के बाद उन्हें एसएमएस अस्पताल में भर्ती किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भर्ती प्रक्रिया में प्रोटोकॉल के पालन नहीं होने के आरोप लगे हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है।

गिरफ्तारी के बाद डॉ. बंसल ने सिरदर्द, चक्कर, बेचैनी, घबराहट और सीने में दर्द जैसी शिकायतें बताईं। इसके बाद रविवार शाम उन्हें एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया, जहां से सीधे जनरल मेडिसिन विभाग में भर्ती कर लिया गया।

सीनियर डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी मरीज को किस विभाग में भर्ती किया जाना है, इसका निर्णय सीनियर चिकित्सक की ओर से प्रारंभिक जांच के आधार पर लिया जाता है। लेकिन इस मामले में एक रेजिडेंट डॉक्टर ने बिना सीनियर कंसल्टेंसी के ही मरीज को जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया, जो नियमों के खिलाफ है।

बताया जा रहा है कि भर्ती पर्ची पर सीनियर डॉक्टर के हस्ताक्षर भी नहीं थे, जिससे प्रक्रिया पर और सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटनाक्रम से मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. महेंद्र अग्रवाल भी नाराज बताए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड का गठन किया है, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ डॉक्टरों को शामिल किया गया है।

प्रारंभिक रिपोर्ट सामान्य, आज होगा फैसला

मेडिसिन विभाग के सीनियर चिकित्सकों के अनुसार, डॉ. बंसल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। इनमें ब्लड की रूटीन जांच, ईसीजी और सीटी स्कैन शामिल हैं, जो सभी सामान्य पाए गए हैं। हालांकि, मेडिकल बोर्ड द्वारा कुछ अतिरिक्त जांचें भी करवाई गई हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है। इन रिपोर्ट्स के आधार पर मेडिकल बोर्ड आज सुबह डॉ. बंसल को अस्पताल में रखने या छुट्टी देने पर अंतिम निर्णय लेगा।

निजी अस्पतालों ने मरीज लौटाए

निजी अस्पतालों में मंगलवार सुबह 8 बजे से शुरू हुए 24 घंटे के शटडाउन का असर राजधानी के सरकारी अस्पतालों पर साफ दिखाई दिया। अधिकांश निजी अस्पतालों ने मरीजों को बिना इलाज ही लौटा दिया।

ऐसे में मरीजों ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया, जिससे ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं पर दबाव बढ़ गया। सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या में करीब 30 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर एसएमएस अस्पताल में देखने को मिला, जहां इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ गई। अवकाश के कारण सुबह 9 से 11 बजे तक संचालित ओपीडी में भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ रही।

सरकारी अस्पतालों ने कस रखी थी कमर

स्थिति संभालने के लिए अन्य सरकारी अस्पतालों में भी अतिरिक्त इंतजाम किए गए। जयपुरिया और कांवटिया अस्पताल में ओपीडी का समय एक घंटे बढ़ाया गया, ताकि अधिक मरीजों को परामर्श और उपचार मिल सके। जयपुरिया अस्पताल की इमरजेंसी में दो अतिरिक्त रेजिडेंट डॉक्टर तैनात किए गए।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. जीवराज सिंह राठौड़ ने बताया कि सामान्यतः रविवार को इमरजेंसी में 200 से 300 मरीज आते हैं और कुल मिलाकर करीब 500 मरीजों का दबाव रहता है। लेकिन हड़ताल के चलते इसमें करीब 30 फीसदी वृद्धि हुई। इनमें कई गंभीर मरीज भी शामिल रहे।

अतिरिक्त सीनियर डॉक्टर और रेजिडेंट तैनात

जेके लोन अस्पताल में भी स्थिति अलग नहीं रही। यहां ओपीडी और इमरजेंसी में देर रात तक करीब 600 मरीज पहुंचे, जो सामान्य दिनों की तुलना में 10 से 15 फीसदी अधिक है। अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी समय बढ़ाने के साथ इमरजेंसी में अतिरिक्त सीनियर डॉक्टर और रेजिडेंट तैनात किए।

गणगौरी अस्पताल में सीनियर डॉक्टर और रेजिडेंट भी इसी तरह की व्यवस्थाएं की गईं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. लीनेश्वर हर्षवर्धन ने बताया कि इमरजेंसी व ओपीडी ब्लॉक में भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त इंतजाम किए गए।

निजी अस्पतालों में नहीं मिला इलाज

  • गांधी पथ स्थित आशापूर्णा मैटरनिटी हॉस्पिटल के मुख्य दरवाजे पर बंद की सूचना चस्पा थी।
  • चित्रकूट स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में आउटडोर बंद था।
  • एमडी रोड पर उनियारा अस्पताल में उवर्शी अपने बच्चे को दिखाने आईं, जिसे भर्ती कर इलाज की जरूरत थी। डॉक्टर ने भर्ती करने से मना कर दिया और जेके लोन ले जाने की सलाह दी।
  • राजस्थान हॉस्पिटल में आउटडोर और इमरजेंसी सेवाएं बंद थीं। आउटडोर में कर्मचारी मरीजों को अगले दिन सुबह 8 बजे बाद आने की सलाह दे रहे थे।
  • करतारपुरा फाटक से रिपोर्ट दिखाने आए मरीज हिमांशु ने बताया कि उसके फेफड़ों में संक्रमण है। रिपोर्ट दिखाने पहुंचे थे, लेकिन यहां आकर पता चला कि आउटडोर बंद है।