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Jaipur News: राजधानी में 'शुद्ध आहार–मिलावट पर वार' अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। कानोता इलाके के हीरावाला इंडस्ट्रियल एरिया में एक दाल फैक्ट्री पर छापा मारकर टीम ने करीब 15 हजार 630 किलो (15.6 टन) संदिग्ध दाल सीज की है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई से मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।
सीएमएचओ जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल के नेतृत्व में जब टीम मैसर्स के.एम. इंडस्ट्रीज पहुंची, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। गोदाम में हरी मूंग दाल और मूंग मोगर के सैकड़ों कट्टे रखे थे। जांच में सामने आया कि 30 किलो वजन के 521 सील्ड कट्टों पर न तो मैन्युफैक्चरिंग डेट थी, न एक्सपायरी और न ही बैच नंबर। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कंपनी का पूरा नाम-पता भी गायब था। गुणवत्ता संदिग्ध होने पर टीम ने पूरी खेप को मौके पर ही सीज कर दिया।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (सुशील चोटवानी, विनोद थारवान और राजेश नागर) ने दाल के नमूने लेकर लैब भेजे हैं। डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि यह दाल खाने लायक है या नहीं। यदि दाल अमानक पाई गई, तो फैक्ट्री का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाजार में दालों को चमकाने के लिए अक्सर हानिकारक रंगों और केमिकल्स का प्रयोग किया जाता है। आप घर पर इन तरीकों से पहचान कर सकते हैं।
पानी का टेस्ट: थोड़ी सी दाल को कांच के गिलास में डालें और ऊपर से गुनगुना पानी भरें। अगर पानी तुरंत पीला या कृत्रिम रंग का हो जाए, तो समझ लें कि दाल पर 'लेड क्रोमेट' या सिंथेटिक कलर की कोटिंग है।
रगड़कर देखें: दाल के दानों को हथेली पर रखकर जोर से रगड़े। अगर हाथ पर रंग उतरने लगे, तो दाल मिलावटी है।
हाइड्रोक्लोरिक एसिड टेस्ट: दाल के कुछ दानों में थोड़ा पानी और हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालें। यदि रंग गुलाबी या बैंगनी हो जाए, तो इसमें 'मेटानिल येलो' (कैंसरकारी रंग) मिला हुआ है।
फंगस और जाले: दाल को ध्यान से देखें, यदि उसमें सफेद पाउडर जैसा दिखे या बारीक जाले नजर आएं, तो वह पुरानी और एक्सपायर्ड हो सकती है।
मिलावटी या एक्सपायरी डेट की दाल खाना धीमे जहर के समान है। डॉ. मनीष मित्तल के अनुसार, इससे निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं।
लिवर और किडनी पर असर: दालों में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रंग लिवर को बुरी तरह डैमेज कर सकते हैं।
पेट का संक्रमण: फंगस वाली दाल से फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट में मरोड़ की समस्या होती है।
कैंसर का खतरा: लंबे समय तक मेटानिल येलो युक्त दाल खाने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों पर बुरा असर: ऐसी दालें बच्चों में कुपोषण पैदा करती हैं और उनकी इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को खत्म कर देती हैं।
एलर्जी: केमिकल्स से प्रोसेस की गई दालों से स्किन एलर्जी और सांस संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। हमेशा भरोसेमंद दुकान से ही सामान खरीदें और पैकिंग पर एफएसएसएआई (FSSAI) नंबर, मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें।
Published on:
08 Jan 2026 08:05 am
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