
जयपुर के हाथीगांव का रेस्टहाउस 7 साल से बंद (Photo-Patrika)
जयपुर. देश के इकलौते हाथीगांव में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करीब 70 लाख रुपए की लागत से बनाया गया वीआईपी रेस्ट हाउस अब ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। निर्माण के 7 साल बीत जाने के बाद भी यहां आज तक एक भी पर्यटक नहीं ठहरा। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के चलते करोड़ों रुपए की पर्यटन परियोजनाओं के बीच बनाया गया यह लग्जरी गेस्ट हाउस अब बदहाली का शिकार है।
हाथीगांव में रोज बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों को ठहरने की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जेडीए ने करीब 7 साल पहले यहां लग्जरी कमरों, एसी, शानदार इंटीरियर और गार्डन से युक्त वीआईपी रेस्ट हाउस तैयार किया था। निर्माण पूरा होने के बाद इसकी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंप दी गई, लेकिन इसका नियमित संचालन आज तक शुरू नहीं हो सका। देखरेख के अभाव में अब परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं, गार्डन उजड़ चुका है और लंबे समय से बंद पड़े कमरों में रखा कीमती सामान भी खराब हो रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रेस्ट हाउस को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित करने के लिए कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी भी निजी फर्म ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। वहीं, हाथीगांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान का कहना है कि समिति ने भी रेस्ट हाउस के संचालन के लिए विभाग को प्रस्ताव दिया था। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते और सरकार को राजस्व भी प्राप्त होता, लेकिन अधिकारियों ने इसे नियमों में उलझाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया।
समिति का कहना है कि वह अब भी रेस्ट हाउस का संचालन करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अधिकारियों की ओर से रुचि दिखाना जरूरी है। इस रेस्ट हाउस को लेकर डीएफओ विजयपाल सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
आमेर किले के पास कुंडा गांव में बना हाथी गांव अपने आप में अनोखी जगह है। इसे देश का पहला और एकमात्र सुनियोजित हाथी गांव माना जाता है। हाथी गांव जून 2010 में बनकर तैयार हुआ था और 22 जून 2010 को इसका उद्घाटन किया था। करीब 120 बीघा यानी 30.5 हेक्टेयर में फैले इस गांव को आमेर महल में पर्यटकों को सवारी कराने वाले हाथियों और उनके महावतों को रहने के लिए बसाया गया था। मकसद था कि हाथियों को एक सुरक्षित और व्यवस्थित जगह मिल सके, जहां वे आराम से रह सकें। गांव में हाथियों के रहने के लिए बड़े-बड़े बाड़े बनाए गए हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘थान’ कहा जाता है। इसके अलावा हाथियों के नहाने और खेलने के लिए बड़े कृत्रिम तालाब भी बनाए गए हैं।
Updated on:
16 Aug 2026 11:00 am
Published on:
16 Aug 2026 11:00 am
