
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सुधा मूर्ति, अक्षता मूर्ति, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और एन आर नारायण मूर्ति।
शालिनी अग्रवाल
Jaipur Literature Festival 2025 : जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सुधा मूर्ति और अक्षता मूर्ति की बातें सुनकर श्रोता खो गए। मां-बेटी और पिता-पुत्र के रिश्तों पर कहीं बड़ी बात। हर मां-बेटी का रिश्ता बेहद खास होता है। मां-बेटी के बीच घंटों बात हो सकती है और ऐसी ही कुछ बातें शनिवार को जेएफएफ के मंच पर हुईं। मां थीं सुधा मूर्ति और बेटी थीं अक्षता मूर्ति, जो माइ मदर, माइ सेल्फ सेशन में मां-बेटी के रिश्ते, अपने बचपन पर अपने बड़ों के प्रभाव, किताबों और समाज सेवा का जीवन में महत्व पर खुल कर बोलीं। सेशन की शुरुआत में ही अक्षता मूर्ति ने कहा कि मुझे अपनी मां से बात करना बहुत पसंद है, जब समय होता है तो हम घंटों बात कर सकते हैं। लेकिन यहां मुझे केवल 40 मिनट का वक्त मिला है तो मुझे काफी फोकस होना पड़ेगा। इस पर सुधा ने कहा कि यह कोई मदर-डॉटर एप्रीसिएशन क्लब नहीं है। सारी मांएं अपनी बेटियों को प्यार करती हैं और सारे पिता अपने बेटों को।
सुधा मूर्ति ने बताया कि उनकी किताब महाश्वेता सफेद धब्बों वाली एक लड़की की कहानी है। उसका अंतिम चैप्टर ए वेडिंग टू रिमेंबर है। उनकी किताब से प्रेरित होकर एक लड़के ने ल्यूकोडर्मा से ग्रस्त लड़की से शादी की। उन लोगों ने उन्हें कहा था कि आपके बिना शादी अधूरी रहेगी।
अक्षता ने बताया कि जब मैं आठ साल की थी तो मैं अपने बर्थडे पर पार्टी देना चाहती थी, लेकिन मां ने सारे पैसे लेकर मेरी पसंद की चैरिटी को दे दिए, उस वक्त मुझे यह बहुत नागवार गुजरा, लेकिन वास्तव में समाज को कुछ देने की मेरी नींव इसी के साथ पड़ी। इस पर सुधा ने कहा कि मैं तुम्हें समोसा और फ्रूटी तो देती ही थी। अक्षता ने कहा कि शायद इसी वजह से उनके जीवन में भगवत गीता का बहुत प्रभाव है। वह कर्मण्येवाधिकारस्ते… में बहुत विश्वास रखती हैं।
अक्षता ने बताया कि अम्मा उन्हें बचपन में एक ओर इतिहास पढ़ाती थीं लेकिन दूसरी ओर उन्होंने फिलोस्फी साइंस, पॉलिटिक्स बारे में पढ़ाया। उन्होंने हमें सिखाया कि भले ही कक्षा में टेस्ट पास करके सीखते हैं, लेकिन आप जिंदगी से भी बहुत कुछ सीखते हैं और जिस दिन सीखना बंद कर देते हैं, आप जीना बंद कर देते हैं। अक्षता ने फोटो इंस्टाग्राम पर भी शेयर किए हैं।
1- नॉलेज किसी एक सोर्स से नहीं आती है, जैसे समुद्र किसी एक नदी से नहीं भरता।
2- अपने आपसे भी सीखते रहें, सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
3- बच्चों को उड़ने दें, लेकिन जताए बिना उनका कंट्रोल अपने हाथ में रखें।
4- लर्निंग बिना किसी भी उद्देश्य के भी होनी चाहिए।
5- अपने परिवार के साथ वक्त गुजरें,उनके साथ सुख दुख वाद विवाद सब कुछ शेयर करें
6- हर सफल औरत के पीछे समझदार आदमी होता है, लेकिन हर सफल आदमी के पीछे नहीं बल्कि उसके साथ चलने वाली औरत होती है।
7- अपने पार्टनर को उसकी सारी कमियों के साथ स्वीकारें और समय समय पर तारीफ करना न भूलें।
8- जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, केवल दृढ़ निश्चय से ही आप मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकल सकते हैं।
9- अगर आपके किसी काम से किसी का भला होता है, तो अवसाद खत्म हो जाता है।
10- जिंदगी में जो कोई भी आपका सिखाता है, वह आपका गुरु होता है।
बच्चों के लिए सुधा और अक्षता ने लिया ब्रेक
एक सवाल के जवाब में सुधा मूर्ति ने कहा कि बच्चों के लिए मैंने और अक्षता ने कॅरियर से ब्रेक लिया था। मां की जरूरत बच्चे को सबसे ज्यादा होती है। हालांकि यह उन दोनों का निजी विचार है। उन्होंने कहा, लड़कों को 14 साल की उम्र तक मां की जरूरत होती, इसके बाद फोन उनका साथी होता है। लड़कियों की जरूरत 12 साल तक होती है, उसके बाद 19 साल की उम्र में वे आपके पास आती हैं। बच्चे थोड़े बड़े होने पर फिर से काम पर लौट जाएं।
खुशी का संपति से लेना-देना नहीं
सुधा मूर्ति ने कहा कि 3000 स्टिचेज किताब 3000 सेक्स वर्कर्स के बारे में है। जिन्होंने रजाई बनाई जिसमें 3000 टांके हैं, मैं हर किसी को वही उपहार में देती हूं। शुरुआत में उन्होंने मुझ पर सड़े टमाटर और चप्पल फेंकी, लेकिन मैं रुकी नहीं। आपके भीतर की संतुष्टि आपको खुश बनाती है, इसका संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं है।
ऋषि सुनक भी पहुंचे
अक्षता मूर्ति के पति और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी पहुंचे। पूरे सेशन के दौरान वह मंत्रमुग्ध होकर अपनी पत्नी और सास को सुनते रहे। उनके साथ नारायण मूर्ति भी थे। सेशन की शुरुआत में ऋषि ने दर्शकों को झुककर नमस्कार भी किया।
Updated on:
02 Feb 2025 12:07 pm
Published on:
02 Feb 2025 10:35 am
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