
सड़क पर पैदल यात्रियों की अनदेखी पर सुप्रीम फटकार, पत्रिका फोटो
Jaipur city: शहरों में अभी सड़कों को वाहन फ्रेंडली बना रहे हैं, लेकिन अब यहां पैदल चलने वालों को भी बराबरी का हक मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ‘सड़क पर पहला अधिकार पैदल ’ मानते हुए देशभर की सरकारों को आदेश दिए हैं। इसके तहत राजस्थान सरकार ने भी नगर निकायों को निर्देश जारी दिए कि नई और सुधारी जाने वाली सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बनाए जाएं। सरकार ने स्पष्ट किया कि सड़क का विकास तभी पूरा माना जाए, जब राहगीरों के लिए फुटपाथ भी शामिल होगा। हर निकाय को वेबसाइट पर कार्य की जानकारी अपलोड करनी होगी। एस राजशेखरन बनाम भारत संघ व अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट आदेश दिए हैं।
● नई सड़कों की डीपीआर में फुटपाथ का प्रावधान रखना होगा।
● आवासीय क्षेत्रों में फुटपाथ की चौड़ाई कम से कम 1.5 मीटर हो।
● बाजार व भीड़भाड़ वाले इलाकों में चौड़ाई 2.5 से 3 मीटर तक हो।
● फुटपाथ का डिजाइन इस तरह हो कि बुजुर्ग, दिव्यांग, महिलाएं व बच्चे भी आसानी से उपयोग कर सकें।
● नियमित निरीक्षण और चालान की कार्रवाई की जाए।
● हर फुटपाथ पर रैम्प, टैक्टाइल टाइल्स, संकेत बोर्ड, बैठने की जगह और छायादार वृक्षों की व्यवस्था हो।
● बिजली, पानी और फोन की लाइनें फुटपाथ के नीचे डक्ट में डालें ताकि रास्ता बाधित न हो।
● फुटपाथ को अतिक्रमण, पार्किंग और अस्थायी दुकानों से मुक्त रखा जाए।
● फुटपाथ के साथ प्रमुख चौराहों व भीड़भाड़ वाले इलाकों में जेब्रा क्रॉसिंग और पैदल यात्री सिग्नल संचालित करने होंगे। ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग पैदल लोगों के आराम से सड़क पार करने के हिसाब से तय हो।
● हर नगर निकाय को अपने परिवहन बजट का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा पैदल यात्री, साइकिल ट्रैक, ग्रीन कॉरिडोर और अन्य नॉन मोटराइज्ड वाहन व जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना होगा।
कई सड़कों पर राहगीरों के लिए जगह नहीं हैं। कहीं फुटपाथ पर बिजली-टेलीफोन बॉक्स हैं। वाहनों की पार्किंग हो रही है। प्रमुख सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग नहीं है। राहगीरों के लिए ट्रैफिक सिग्नल टाइमर का भी अभाव है।
Updated on:
30 Jul 2025, 10:00 AM IST
Published on:
30 Jul 2025, 9:59 AM IST
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