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जयपुर: थ्री डिजिट नंबरों के फर्जीवाड़े में पुलिस का एक्शन शुरू, RTO का बाबू डिटेन, पुरानी गाड़ियों के नंबर नए वाहनों को बेचे

Three Digit Number Fraud: परिवहन विभाग के चर्चित थ्री डिजिट नंबर फर्जीवाड़े मामले में गांधीनगर थाना पुलिस ने आरटीओ-प्रथम के एक बाबू को डिटेन कर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

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जयपुर

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Arvind Rao

Apr 23, 2026

Jaipur Police act in three-digit number scam RTO clerk detained old vehicle numbers sold to new vehicles

RTO नंबर स्कैम, 38 लोगों के खिलाफ FIR (फोटो-एआई)

Three-Digit VIP Number Scam in Rajasthan: जयपुर: राजधानी के परिवहन विभाग में हुए बहुचर्चित 'थ्री डिजिट नंबर' फर्जीवाड़े मामले में गांधीनगर थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस घोटाले के सिलसिले में आरटीओ-प्रथम कार्यालय के एक बाबू को हिरासत में लिया है, जिससे पूछताछ जारी है।

बता दें कि इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के भीतर और बाहर सक्रिय भू-माफियाओं और दलालों के बीच हड़कंप मचा दिया है। शुरुआती जांच में यह बात स्पष्ट होकर सामने आई है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क का खेल है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह पुराने और निष्प्रभावी हो चुके वाहन नंबरों को कूटरचना (फर्जीवाड़े) के जरिए दोबारा 'जिंदा' करने का काम कर रहा था। इसमें विशेष रूप से साल 1989 से पहले की सीरीज के उन नंबरों को निशाना बनाया गया, जिनकी वैधता या तो समाप्त हो चुकी थी या जिन्हें रिकॉर्ड में कबाड़ (स्क्रैप) घोषित किया जा चुका था।

राजस्व को भारी चपत

नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस खेल में बैकलॉग एंट्री के माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और पुराने कीमती नंबरों को अवैध रूप से नए वाहनों को आवंटित कर दिया गया। इस प्रक्रिया में न तो कोई भौतिक सत्यापन हुआ और न ही अनिवार्य निरीक्षण प्रक्रिया का पालन किया गया।

इस घोटाले के कारण राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है। राजस्थान पत्रिका द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद विभाग और पुलिस प्रशासन हरकत में आया।

38 लोगों पर नामजद शिकंजा

इस पूरे प्रकरण की जड़ें 9 दिसंबर 2025 को मिली गड़बड़ी से जुड़ी हैं, जब आरटीओ प्रथम कार्यालय ने आवंटन में बड़ी विसंगति पकड़ी थी। इसके बाद 4 जनवरी को तत्कालीन एआरटीओ की ओर से गांधी नगर थाने में आधिकारिक मुकदमा दर्ज कराया गया।

वर्तमान में इस मामले में 38 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज है, जिनमें विभागीय कर्मचारी, दलाल और वे वाहन मालिक शामिल हैं जिन्होंने इन नंबरों को अवैध तरीके से खरीदा।

पुलिस अब पकड़े गए कर्मचारी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य रसूखदारों तक पहुंचा जा सके। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में परिवहन विभाग के कई और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।