
पिछले छह साल में पुरोहित जी के कटले में यह तीसरी बड़ी आग है। फोटो पत्रिका
Fire Incident in Jaipur: जयपुर का परकोटा केवल बाजारों का समूह नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। लेकिन इसी परकोटे में बार-बार लगती आग यह सवाल पूछ रही है कि हादसों के बाद योजनाएं बनती हैं तो उन पर अमल क्यों नहीं होता? पुरोहित जी के कटले और उससे सटे मणिहारों के कटले में गुरुवार को लगी भीषण आग ने एक बार फिर व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को सामने ला दिया है।
यह पहली घटना नहीं है। पिछले छह साल में पुरोहित जी के कटले में यह तीसरी बड़ी आग है। जुलाई 2020 में आग ने लाखों का नुकसान किया था। अक्टूबर 2022 में दीपावली से ठीक पहले फिर आग लगी। अब एक बार फिर आग ने बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। हर बार वही संकरी गलियां, वही अतिक्रमण, वही ज्वलनशील सामान और वही दमकलों की पहुंच में परेशानी। सवाल है कि पिछली घटनाओं से आखिर सीखा क्या गया ?
पुरोहित जी के कटले में ही 535 से अधिक दुकानें बताई जा रही हैं। यहां कपड़े, प्लास्टिक, चूड़ी, शादी-ब्याह और अन्य ज्वलनशील सामान का कारोबार होता है। दुकानों के बाहर और रास्तों में सामान रखना आग के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। करीब पांच फीट चौड़े रास्ते अतिक्रमण के कारण और संकरे हो जाएं तो आपदा के समय दमकल की गाड़ी तो दूर, आम आदमी के लिए निकलना भी मुश्किल हो जाता है।
सबसे गंभीर सवाल करोड़ों रुपए की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर है। करीब 3.90 करोड़ रुपए की लागत से हाइड्रेंट पंप हाउस, सात किलोमीटर पाइपलाइन, 2.10 लाख लीटर क्षमता का टैंक और 24 घंटे निगरानी जैसी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। पुरोहित जी के कटले में 14 हाइड्रेंट भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद यदि व्यापारी यह आरोप लगाएं कि कई हाइड्रेंट के वाल्व और कपलिंग गायब हैं, तो इसकी जांच केवल कागजों में नहीं होनी चाहिए।
सरकार और प्रशासन के सामने अब नई योजना बनाने का नहीं, पुरानी योजनाओं को जमीन पर उतारने का समय है। फायर ऑडिट, हाइड्रेंट की नियमित जांच, अतिक्रमण हटाना, आपातकालीन रास्तों को खुला रखना और अवैध निर्माण पर तत्काल कार्रवाई। इन सभी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
गनीमत है यह आग सुबह 7 बजे लगी, जिससे बडा हादसा होने से भी बच गया। यदि यही आग शाम पांच—छह बजे के आस—पास लगती है कि हादसा और भयानक हो सकता था। उस समय कटले में दुकानें खुली रहती है। वाहनों व ग्राहकों की आवाजाही से दमकलों को पहुंचने में परेशानी होती ।
परकोटे में अगली आग नहीं लगे इसके लिए चाहिए कि दमकल को आग तक पहुंचने में रास्ता मिले। हर हादसे के बाद मुआयना और हर आग के बाद नई घोषणा पर्याप्त नहीं। जनता की सुरक्षा कागज की योजना नहींए जमीन पर दिखाई देने वाली व्यवस्था मांगती है।
Updated on:
17 Sept 2026 02:15 pm
Published on:
17 Sept 2026 02:15 pm
