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जयपुर के डॉक्टरों का करिश्मा, 20 साल से नहीं हो पा रही थी अपने पैरों पर खड़ी, सर्जरी के बाद किया ठीक

3डी प्रिंटिंग से तैयार किया हिप जॉइंट मॉडल, राजस्थान में इस तरह का पहला ऑपरेशन का दावा, 20 साल से पैर सीधे नहीं हुए, सर्जरी के तुरंत बाद चलने लगी

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जयपुर के डॉक्टरों का करिश्मा, 20 साल से नहीं हो पा रही थी अपने पैरों पर खड़ी, सर्जरी के बाद किया ठीक

जयपुर के डॉक्टरों का करिश्मा, 20 साल से नहीं हो पा रही थी अपने पैरों पर खड़ी, सर्जरी के बाद किया ठीक

अविनाश बाकोलिया / जयपुर। बीस साल से पैरों से चलने-फिरने, दैनिक कार्य कर पाने में असमर्थ शालिनी (परिवर्तित नाम) के लिए डॉक्टर भगवान सबित हुए। एंकालूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी में कूल्हे के जोड़ एक जगह जड़ हो जाने पर शहर के चिकित्सकों ने इस जटिल केस को 3डी प्रिंटिंग तकनीक की सहायता से सफलतापूर्वक ठीक कर दिया। दावा है कि राजस्थान में इस तरह के ऑपरेशन का पहला मामला है। मानसरोवर स्थित एक हॉस्पिटल में यह सर्जरी की गई है।

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कूल्हे के जोड़ों की चाल खत्म हो गई।

हॉस्पिटल के सीनियर जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. धीरज दुबे ने बताया कि अलवर की 35 वर्षीय शालिनी को पिछले 20 वर्षों से एंकालूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की गंभीर बीमारी थी। इससे मरीज के कूल्हे के दोनों जोड़ों की चाल बिल्कुल खत्म हो गई थी। इस समस्या के कारण मरीज न तो ढंग से चल-फिर पाती थी और न ही दैनिक कार्य कर पा रही थी।

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सर्जरी में थे बहुत जोखिम
कूल्हों में फिर से चाल लाने के लिए उसकी संरचना की सघन जांच की गई। ऐसे में पहले डॉक्टर्स ने 3डी प्रिंटिंग के जरिए कूल्हों की संरचना की प्रतिकृति बनाई और ऑपरेशन किया। ऑपरेशन में डबल विंडो तकनीक से हिप जॉइंट्स को खोला गया और मरीज को नए इंप्लांट लगाए गए। इसके अलावा ऑपरेशन के दौरान इंट्रा ऑपरेटिव कंटीनियस सेचुरेशन तकनीक से मरीज के शरीर में रक्त प्रवाह पर लगातार नजर रखी गई क्योंकि सर्जरी में खून की नसों में प्रवाह बंद होने का पूरा खतरा था। ऐसा इसीलिए था क्योंकि काफी समय से पैरों की एक ही स्थिति रहने के कारण मरीज की पैर की नसें संकुचित हो गई थी। ऑपरेशन में सारी सावधानियां रखने के बाद उसी दिन मरीज ने चलना भी शुरू कर दिया।