
जयपुर का प्रतिष्ठित पतंग उद्योग, पत्रिका फोटो
kite festival in Jaipur: जयपुर। मेड इन जयपुर पतंगें अब सिर्फ परकोटे तक सीमित नहीं रहीं, वे देश के अलग-अलग राज्यों के आसमान में रंग भर रही हैं। जगन्नाथ शाह का रास्ता पतंग उद्योग का ऐसा केंद्र बन गया है, जहां 400 से अधिक परिवार सालभर इस कला में जुटे रहते हैं। कई लोगों का यह पुश्तैनी कारोबार है।
पतंग उद्योग से कई परिवारों को रोजगार मिल रहा है। यहां की बनी पतंगें मध्य भारत में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ से लेकर पूर्व में बंगाल से पश्चिम में गुजरात तक और दक्षिण में तमिलनाडु से उत्तर में पंजाब के आसमां तक में परवाज भरती हैं।
जगन्नाथ शाह का रास्ता में हांडीपुरा, मोहल्ला मोमिनान, मोहल्ला नाहरवाड़ा, मोहल्ला चीतावालान, मोहल्ला पेगान व साहू का मोहल्ला में घर-घर में पतंग बनाने का काम हो रहा है। पतंग कारीगर मोहम्मद गफूर खान ने बताया कि पहले छोटी-छोटी पतंगें बनाते थे, अब बड़ी पतंगें अधिक बन रही हैं। पहले एक पतंग को एक आदमी ही तैयार कर लेता था, अब एक पतंग 7-8 लोगों के हाथों से होकर निकलती है, तब वह तैयार होती है। यह आजीविका का माध्यम बना हुआ है।
जिन हाथों से ये उड़ान मिलती है, वे अब भी ज़मीन से जुड़े हैं। व्यापारी पतंग बनवाने के लिए कच्चा माल लाकर देते हैं। कारीगर को एक हजार फैंसी पतंग बनाने पर 600 से 700 रुपए और सादा पतंग बनाने पर 400 से 500 रुपए मिल रहे हैं। साढ़े 21 इंच से लेकर 42 इंच की पतंगें अधिक बन रही हैं। सरकारें कहती हैं कि हुनर को बढ़ावा देंगे, लेकिन पतंग बनाने वालों का कहना है कहते हैं कि हम हवा में रंग तो भरते हैं, मगर जेब में खालीपन ही उड़ता है।
पतंग का कागज मुंबई से आता है, जबकि ठड्डा (बांस की कांप) कोलकाता से आ रहा है। सबसे पहले कागज की कटिंग कर उसे डिजाइन दी जाती है। उसके बाद महिलाएं डोरा डालकर कागज की जुड़ाई का काम करती हैं। फिर उसमें कांप डाला जाता है। सबसे आखिरी में पतंग में पत्ता लगाने का काम होता है।
पतंग कारीगरों ने बताया कि मकर संक्रांति पर शहर में बरेली व अहमदाबाद की पतंगें भी उड़ती है, वैसे ही वहां पर भी पतंग उत्सव में जयपुर की पतंगें जाती हैं। वहां भी लोग जयपुर की पतंगों को पंसद करते हैं।
| राज्य | प्रमुख शहर | पर्व | तिथि |
|---|---|---|---|
| राजस्थान | जयपुर, बीकानेर, जोधपुर | मकर संक्रांति, आखा तीज, रक्षाबंधन | क्रमशः |
| गुजरात | अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा | उत्तरायण (मकर संक्रांति) | 14 जनवरी |
| दिल्ली | दिल्ली | स्वतंत्रता दिवस | 15 अगस्त |
| पंजाब | लुधियाना, अमृतसर | लोहड़ी | 13 जनवरी |
| तमिलनाडु | चेन्नई, मदुरै | पोंगल | 14–17 जनवरी |
| मध्य प्रदेश | इंदौर, उज्जैन | मकर संक्रांति | 14 जनवरी |
| उत्तर प्रदेश | बरेली, वाराणसी, लखनऊ | मकर संक्रांति, स्थानीय मेले | 14 जनवरी (मुख्य) |
| महाराष्ट्र | मुंबई, पुणे | मकर संक्रांति | 14 जनवरी |
| हरियाणा | रोहतक, हिसार | मकर संक्रांति | 14 जनवरी |
| पश्चिम बंगाल | कोलकाता | वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा | जनवरी–फरवरी (तिथि परिवर्तनीय) |
अभी जयपुर व पंजाब के लिए पतंगे बना रहे हैं। मकर संक्रांति के बाद बीकानेर का सीजन शुरू हो जाएगा। उसके बाद दिल्ली के लिए पतंगें बनाने लग जाएंगे। ऐसे सालभर पतंग बनाने का काम करते हैं।
-रामस्वरूप साहू, पतंग कारीगर
Updated on:
06 Jan 2026 01:50 pm
Published on:
06 Jan 2026 10:33 am
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