
नूपुर शर्मा/जयपुर
जल जीवन मिशन क्या है ?
जल जीवन मिशन का उद्देश्य राज्यों के उन क्षेत्रों में पानी की सुविधा उपलब्ध कराना है जहां बढ़ती आबादी के साथ पानी की समस्या भी बढ़ रही है। कई क्षेत्र जैसे झोटवाड़ा, निवारू रोड, जगदीश कॉलोनी, लक्ष्मी नगर, लक्ष्मी नगर II, संजय नगर, अयोध्या धाम नंदगांव कॉलोनी जहां पानी की सुविधा नहीं है । कुछ ग्रामीण इलाकों की हालत तो ऐसी है कि लोगों को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है। पानी की किल्लत से किसान भी परेशान है
लोगों के घरों में नहीं है पानी
इस मिशन के तहत जिन इलाकों में पानी नहीं है वहां पाइपलाइन के जरिए पानी की आपूर्ति की जानी है । इस मिशन को सरकार ने "हर घर जल योजना" नाम दिया है। मिशन को सफल बनाने के लिए सरकार ने 3 लाख 60 हजार करोड़ रूपए खर्च किए। 2019 से शुरु इस योजना के लिए केंद्र ने 2 लाख करोड़ रुपये और राज्य सरकार ने 1,50 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया है। आंकड़ों के मुताबिक देश के करोड़ों लोगों के परिवारों को पीने के पानी के लिए घरेलू नल कनेक्शन मुहैया कराने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि 2024 तक सभी परिवारों को पीने का पानी मिले। राजस्थान में, लाभान्वित ग्रामीण क्षेत्र करीब 3.69% हैं। लेकिन असल चुनौती स्रोत की स्थिरता और पानी की आपूर्ति की गुणवत्ता में निर्भर है।
इस मिशन में पीछे छूटा राजस्थान
इस मिशन में राजस्थान की रफ्तार थम गई है, जिससे वो दूसरे राज्यों में पिछड़ गया है। जल जीवन मिशन के तहत जहां डोर-टू-डोर नल कनेक्शन उपलब्ध कराने में राजस्थान पहले 29वें स्थान पर था, अब वह 31वें स्थान पर आ गया है। जल जीवन मिशन की धीमी रफ्तार से सरकार चिंतित है । सरकार का मुख्य फोकस काम को मंजूरी देना है लेकिन जमीन पर निगरानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण घर-घर जाकर नल कनेक्शन जारी करने में पिछड़ वो रही है। जानकारी के मुताबिक अब तक कुल 3.27 करोड़ परिवारों को पानी के कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
बिन पानी सब सून
जल जीवन मिशन में स्वीकृत कार्यों को तीन साल बीत चुका है, फिर भी राजस्थान के कुछ जिलों में पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। चौमू के पास स्थित मोरिजा गांव के लोग दो साल से पेयजल आपूर्ति के लिए हांफते नलकूपों पर निर्भर हैं। पेयजल आपूर्ति की स्थिति ऐसी हो गई है कि गांव के कई स्थानों पर आपूर्ति नहीं हो रही है और हमेशा 15 से 20 मिनट की देरी होती है। अब गांव के लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। गांव में पेयजल आपूर्ति के समाधान के लिए मिशन के तहत लगभग 57 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई है, एक वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन इस योजना से जुड़े कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं।
झोटवाड़ा के निवारू रोड क्षेत्र की कॉलोनियों में पानी की किल्लत से परेशान लोग 20 सितंबर को झोटवाड़ा सहायक अभियंता कार्यालय पहुंचे. सहायक अभियंता रवि जांगिड़ व कनिष्ठ अभियंता नहीं मिलने पर लोग भड़क गए और वहीं धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की. लोगों ने कहा कि जब जलापूर्ति विभाग पूरे महीने का बिल ले रहा है तो बूंद-बूंद पानी क्यों दे रहा है? आदर्श नगर, हवामहल और किशनपोल क्षेत्र में पेयजल की समस्या को लेकर जयपुर में विधायकों की बैठक हो चुकी है।
सभी का सवाल अब भी वही है करोड़ों घरों में पानी कहां से आएगा।
Updated on:
23 Sept 2022 06:03 pm
Published on:
23 Sept 2022 05:53 pm
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