
हिंगोनिया गोशाला से सटी जमीन पर खुली जेल के निर्माण में नया मोड़ आ गया है। नगर निगम ने जेल के निर्माण के लिए जिस जमीन का चिह्निकरण किया है, वो ज़मीन जेडीए की है। बिना पूछे इस जमीन पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण करने पर जेडीसी शिखर अग्रवाल ने नाराजगी जताई और कहा कि कोर्ट के आदेश में कहीं भी गांव या खसरा नंबर का उल्लेख नहीं है, फिर किस आधार पर जमीन तय की गई।
हाईकोर्ट के निर्देश पर जेडीसी शिखर अग्रवाल, नगर निगम आयुक्त हेमंत गेरा व जिला कलेक्टर सिद्धार्थ महाजन गोशाला पहुंचे। एसीएस होम ने भी इन अधिकारियों को निरीक्षण कर मीटिंग करने के निर्देश दिए थे। सभी अधिकारियों ने यहां निरीक्षण करने के बाद बैठक की तो बैठक में टाइटल का मुद्दा उठा।
जेडीसी ने कहा क्या इस जमीन का टाइटल नगर निगम के नाम पर है। इस पर निगम अधिकारियों ने मना कर दिया। निगम के अधिकारियों के पास जमीन का नक्शा भी नहीं था। यह सुन जेडीसी भड़क गए और कहा कि जब टाइटल आपके नाम नहीं है तो फिर यहां कैसे निर्माण किया गया। यह तो अतिक्रमण है।
9 बीघा के लिए इतनी बड़ी जमीन क्यों खराब कर रहे हो
जेडीसी ने बैठक में कहा कि जहां खुली जेल बनाई जा रही है, उसकी गोशाला से दूरी है। एेसे में गोशाला के आसपास ही खुली जेल बनवाई जाए, ताकि बंदियों से गोशाला में काम करवाया जा सके। जेडीसी ने यहां तक कह दिया कि जो पैसा बाउंड्रीवॉल व अन्य कार्यों पर खर्च किया गया है, उसका भुगतान जेडीए कर देगा।
जमीन के क्षेत्रफल में अंतर
कोर्ट में यहां खाली जमीन 382 बीघा बताई गई, लेकिन मौके पर जमीन का क्षेत्रफल 311 बीघा है। वहीं कोर्ट का जो आदेश है उसमें भी जमीन के खसरे नंबर व गांव का उल्लेख नहीं है। एेसे में जेडीसी की आपत्ति के बाद नगर निगम अधिकारियों के चेहरे पीले पड़ गए।
जेडीसी व सुराणा में हॉट टॉक
खुली जेल के मसले पर हिंगोनिया गोशाला में बैठक रखी गई थी। बैठक से पहले जेडीसी योजना की ब्रीफिंग लेने में लग गए। इस पर अधिवक्ता सज्जन सिंह सुराणा ने आपत्ति दर्ज कराई तो जेडीसी ने कह दिया कि बैठक से पहले ब्रीफिंग लेना जरूरी है।
इसे लेकर दोनों में बहस हो गई और सुराणा बैठक से उठकर चले गए। बाद में दूसरी बैठक में सुराणा शामिल हुए।
Published on:
08 May 2016 10:29 pm
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