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जेएलएफ -2019 : ब्रह्म विवर्त और द टाओ ऑफ स्प्रिच्युएलिटी
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जेएलएफ -2019 : ब्रह्म विवर्त और द टाओ ऑफ स्प्रिच्युएलिटी

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जेएलएफ -2019: ब्रह्म विवर्त और द टाओ ऑफ स्प्रिच्युएलिटी

-पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की किताबों का विमोचन

—विज्ञान में जो मैटर और एनर्जी…वेद में वह ब्रह्म और माया

जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2019 में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की ब्रह्म विवर्त और द टाओ ऑफ स्प्रिच्युएलिटी पुस्तकों का शुक्रवार को विमोचन किया गया। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिन्दी ग्रंथ अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. वेदप्रकाश सोलंकी ने कहा कि जो लोग तकनीक पसंद करते हैं और साहित्य को कमतर आंकते हैं। वे साहित्य के प्रति असीम उत्साह यहां देख सकते हैं। उन्होंने कोठारी में सृजन की विलक्षण प्रतिभा बताई। उन्होंने कहा कि वे अलग-अलग विषयों पर कई किताबें लिख चुके हैं। उन्होंने वेद विज्ञान का अनुसंधान कर उसे आसान भाषा में हमें बताया है। इनमें से कई किताबों का अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है। ये दोनों किताबें भी इसी कड़ी में सामने आई हैं। दोनों ही किताबें मौलिकता लिए हुई हैं और जीवन की यथार्थ पर व्यापक रूप से प्रकाश डालती है।

—ब्रह्म विवर्त: वेदों का उत्तर आध्यात्मिक…विज्ञान सम्मत

रंग-बिरंगी दुनिया कैसी बनी और इसका विकास कैसे हुआ, इसका जवाब हमें ‘ब्रह्म विवर्तÓ पुस्तक से मिलता है। पुस्तक की विवेचना करते हुए पत्रिका डिप्टी एडिटर आनंद जोशी ने कहा कि दुनिया की उत्पत्ति और विकास को लेकर विज्ञान अपनी तरह से उत्तर देता है और हमारे प्राचीन ग्रंथ वेद अपने तरीके से देते हैं। यह वेदों का उत्तर जितना आध्यात्मिक है, उतना ही विज्ञान सम्मत भी है। विज्ञान जिसे मैटर और एनर्जी कहते हैं, हमारे वेद उसे ब्रह्म और माया कहते हैं। ब्रह्मतत्व को जानने के लिए वेद विज्ञान को जानना जरूरी है। इस सृष्टि को ब्रह्म का विवर्त कहा गया है। जो कुछ भी बना, इसी ब्रह्म से बना और कालांतर में यह सब ब्रह्म में लुप्त हो जाएगा। आमतौर पर हमारी यह अवधारणा है कि वेद, पुराण, उपनिषद को वैज्ञानिक नहीं है, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा पुराना साहित्य विज्ञान सम्मत है। किताब इसको ही बताती है।

-चार पुरुषार्थ के अनुसरण से ही अच्छा जीवन

अणुव्रत ग्लोबल आर्गेनाइजेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एस.एल. गांधी ने कहा कि ‘द टाओ ऑफ स्प्रिच्यूअलिटीÓ पुस्तक को लेकर बताया कि यह किताब मनुष्य को आध्यात्मिकता का मार्गदर्शन करने वाली है। उन्होंने कहा कि यह संसार दुखों का समुद्र है। यदि कोई मनुष्य पाश्विक जीवन व्यतीत करना चाहता है तो वह गर्त में जाता है। लेकिन मनुष्य के लिए अच्छे जीवन का अवसर भी है, लेकिन वह तब संभव है जबकि चार पुरुषार्थ का अनुसरण करें। काम, धर्म, अर्थ और मोक्ष का उद्देश्यों में संतुलन स्थापित कर जीवन बिताकर अच्छा जीवन जी सकता है। कभी-कभी मनुष्य की कामना लालच और वासना में बदल जाती है। इस किताब के माध्यम से कोठारी ने लोगों को संदेश दिया कि जीवन का उद्देश्य मोक्ष है और धर्म इसे प्राप्त करने में मदद करता है। यह पुस्तक उन सब लोगों के लिए उपयोगी जो जीवन में आनंद की तलाश में लगे हुए हैं। विमोचन समारोह का संचालन प्रवीण नाहटा ने किया।