
जयपुर के चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता (Photo-Patrika)
Martyrs Portraits: वर्ष 1999 में करगिल की चोटियों की रक्षा के लिए भारतीय सेना के कई जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस युद्ध ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जयपुर के चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता (55) भी इससे गहराई से प्रभावित हुए। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए पहला पोर्ट्रेट करगिल के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट अजय आहूजा का बनाया और स्वयं कोटा जाकर उनके परिजनों को भेंट किया। परिवार की आंखों में गर्व और दर्द का संगम देखकर उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल गई।
वर्दी, बैज और रैंक का रखते पूरा ध्यान: चंद्रप्रकाश बताते हैं कि जैसे ही किसी सैनिक की शहादत की सूचना मिलती है, वे उसकी फोटो और आवश्यक जानकारी जुटाना शुरू कर देते हैं। पोर्ट्रेट बनाते समय वर्दी, बैज, रैंक और मेडल तक का विशेष ध्यान रखते हैं। पूरी मुहिम का खर्च भी वे स्वयं उठाते हैं। किसी संस्था या सरकार से आर्थिक सहायता नहीं लेते। राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री सहित कई संस्थाओं की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। वे कहते हैं कि करगिल ने मुझे सिखाया कि हर शहीद पूरे देश का बेटा होता है। जब तक सांस है, मेरी कूची करगिल के वीरों समेत हर शहीद को सलाम करती रहेगी।
करगिल युद्ध में शहीद हुए राजस्थान के 70 वीरों के पोर्ट्रेट बनाकर चंद्रप्रकाश एक-एक परिवार तक पहुंचे। वहीं, उन्होंने संकल्प लिया कि राजस्थान का कोई भी शहीद ऐसा नहीं रहेगा, जिसके घर उनकी बनाई तस्वीर नहीं पहुंचे। यह मुहिम 27 साल बाद भी लगातार जारी है। अब तक वे 400 से ज्यादा शहीदों के पोर्ट्रेट बनाकर उनके परिजनों को भेंट कर चुके हैं। वे बताते हैं कि युद्ध के समय न सोशल मीडिया था और न ही स्मार्टफोन। शहीदों की तस्वीरें जुटाने के लिए पोस्टकार्ड और चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं। कई बार एक फोटो आने में हफ्तों लग जाते थे। आज तकनीक ने यह काम आसान कर दिया है, लेकिन उनकी परंपरा नहीं बदली। वे आज भी हर पोर्ट्रेट स्वयं शहीद के घर जाकर परिजनों को भेंट करते हैं।
करगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई 1999 के दौरान लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों और सैनिकों ने कारगिल, द्रास और बटालिक सेक्टर की कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था।
करीब 60 दिन तक चले इस युद्ध में भारतीय जवानों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में लड़ते हुए सभी रणनीतिक चोटियों पर दोबारा कब्जा कर लिया। इस युद्ध में भारत के 527 सैनिक शहीद हुए। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना की जीत के साथ युद्ध समाप्त हुआ और तभी से हर साल इस दिन 'कारगिल विजय दिवस' मनाया जाता है।
Updated on:
26 Jul 2026 01:28 pm
Published on:
26 Jul 2026 01:28 pm
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