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स्मृति में… राजस्थान की धड़कनों में कुलिशजी

काव्यांजलि

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Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year

1926 मार्च बीस, हुआ अवतरण कर्पूर कुलिश, सदा सराहने वाले कुलिश।
सादा जीवन ऊंची सोच, निर्भिकता से ओत-प्रोत, जीवन जीने वाले कुलिश।
सामाजिकता का पाठ पढ़ाया, जीने का रुतबा बतलाया, शिक्षा देने वाले कुलिश।
पत्रकारिता लक्ष्य बनाया, हिन्दी का था मान बढ़ाया, निर्भय लिखने वाले कुलिश।
अन्यायों का चकनाचूर, राजनीति से रहकर दूर, हमेशा करने वाले कुलिश।
लोकतंत्र की अलख जगाना, हर वोट का महत्व बताना, जागृति लाने वाले कुलिश।
राजस्थान पत्रिका देश में आई, हर क्षेत्र में क्रांति लाई, संपादन करने वाले कुलिश।
2006 जनवरी सतरा, देश का रोया कतरा-कतरा, मातृभूमि से मिले कुलिश।
जन्मशती का पर्व है आया, शर्मा बलबीर यूं फरमाया।
कबहूं न मिटने वाले कुलिश।
कबहूं न मिटने वाले कुलिश।।

  • बलबीर कुमार शर्मा, सूरतगढ़

मरुधर की माटी को जिसने, चेतन स्वर आलाप दिया।
कण-कण की पीड़ा ने जिसके, शब्दों में आकर लिया।
'राजस्थान पत्रिका' लाकर, जन-जागृति का नाद किया।
प्रबल सबल आवाज बना पुनि, जन-जन से संवाद किया।
सत का पथ अपनाया जिसने, निर्भयता से हाथ मिला।
कष्ट-कंटकों में था जिसका, यशमय जीवन-सुमन खिला।
राष्ट्रधर्म को पत्रकारिता के जरिए समझाते थे।
जन-पीड़ा का बन गायक जो, सत्ता से टकराते थे।
सौ वर्षों की साख सुहानी, कदम-कदम पर कहती है।
नदी रवानी से बहती है, पानी से ना बहती है।
दुख के दिन को दुख ना माना, तप-वासर बतलाया है।
इसीलिए कर्पूर कलम से, यह जादू कर पाए हैं।
'कुलिश' तखल्लुस किया सार्थक, गर्वित मस्तक वक्ष तना।
सज्जन के हित रत्न अमोलक, दुर्जन के हित वज्र बना।।
जन्मशती पर शत शत वंदन, करके शीश झुकाता हूं हे साधक!
ये शब्द-सुमन, श्रद्धा से तुम्हें चढ़ाता हूं।।

  • डॉ. गजादान चारण, डीडवाना

कुलिश साहब के चले जाने से हुई थी हमको भारी हानि
युगों युगों तक अमर रहेगी कुलिश साहब की अमर कहानी।
आप हमारे पथ प्रदर्शक वेदों के थे ज्ञाता महान
राजस्थान पत्रिका का पौधा लगाया जो आज बन गया वटवृक्ष महान।
पथ प्रणेता आप हमारे आपका साहित्य है अमर निशानी,
युगों युगों तक अमर रहेगी कुलिश साहब की अमर कहानी।
जाने कितनी पुस्तकें लिखी आप थे बहुत बड़े विद्वान,
देश-विदेश में भी है आपने बढ़ाया मर्यादा का मान।
साहित्य जगत को आपने अर्पित कर दी जिंदगानी,
युगों युगों तक
अमर रहेगी कुलिश साहब की अमर कहानी। सादा जीवन उच्च विचार आपने बांटा जन-जन में प्यार, बाधाएं चाहे आई हजार, आपने कभी नहीं मानी हार।
आपके जीवन से सीख लेकर गौरवान्वित है हर राजस्थानी,
युगों युगों तक अमर रहेगी कुलिश साहब की अमर कहानी।
हर सांस में बसे हैं आप, हर आस में बसे हैं आप,
पत्रकारिता के सूरज आप, सदैव ही अमर हैं आप।
जब तक सूरज चांद रहेगा और रहेगी धरा सुहानी,
युगों युगों तक अमर रहेगी कुलिश साहब की अमर कहानी।

  • दलपत सिंह राजपुरोहित, शिवनगर, पाली

सोडा की माटी से उठकर,
जिसने नूतन भोर लिखा,
जन-जन की संचित पीड़ा को,
जिसने अपना मौर लिखा।
संस्कृत की उस क्लिष्टता को, सहज भाव में बुना,
बौद्धिक वंभ को तज कर उन्होंने, 'आम बोलचाल' को चुना।
जब दिल्ली की सत्ता के स्वर, अहंकार से चूर हुए,
तब कुलिशजी के 'मौन शंख' से, अत्याचारी दूर हुए।
लेखनी उनकी रुकी नहीं,
'धाराप्रवाह' बहती रही,
सत्य की खातिर जो तपे, वे
पुरुष सवा सिन्दूर हुए।
वेद-पुराणों की वाणी को,
आधुनिक दृष्टि प्रदान की,
भारतीय भाषाओं की गूंज,
विश्व मंच पर तान दी।
उनकी पावन स्मृतियों ने,
फिर से नई मुस्कान दी।
विरासत उनकी बनी रहे, हम जनपक्षीय स्वर पालेंगे,
गीतों के सुर-साज सजाकर,
नया भविष्य संवारेंगे।
कुलिशजी के उस स्वप्न को,
घर-घर तक पहुंचाना है,
सत्य, शुचिता और कलम से,
फिर इतिहास बनाना है।

  • गणेश गाड़ोदिया, सूरत