
खासा कोठी पुलिया पर सन्नाटा और नीचे लगी वाहनों की रेलमपेल। हर दिन एक से डेढ़ किमी तक जाम लगता है।
जयपुर. सुविधा के लिए बना निर्माण यदि बेतुका हो तो शहर के लिए नासूर बन जाता है। खासा कोठी फ्लाईओवर इसका जीता जागता नमूना है। यातायात को सुगम बनाने के लिए करीब 25 करोड़ रुपए खर्च कर बनाया गया यह फ्लाईओवर किसी काम का नहीं। जिम्मेदारों की इंजीनियरिंग देखिए, जिस रूट पर (एमआइ रोड से कलक्ट्रेट) रोजाना । लाख से ज्यादा वाहन जाम में फंसते हैं, वहां फ्लाइओवर का नामोनिशान नहीं है और जिस दिशा में फ्लाईओवर बना दिया गया, वहां दिन भर में महज 5 से 8 हजार वाहन ही गुजरते हैं। हालात ये है कि इस फ्लाईओवर पर अब गाड़ियां नहीं, अवैध पार्किंग होती है। क्या जनता के टैक्स का पैसा इसी तमाशे के लिए था?
साल 2002 में सब कुछ तय था। अलाइनमेंट एमआइ रोड से बनीपार्क की ओर प्रस्तावित था, लेकिन 2005-06 में अचानक अदृश्य ताकतों ने अलाइनमेंट बदलवा दिया। कार्यदिश में कुछ और, हकीकत में कुछ और… अपनों को फायदा पहुंचाने और चहेतों को बचाने के लिए पूरे शहर को जाम के दलदल में धकेल दिया गया। 16 साल पहले बोए भ्रष्टाचार का यह पौधा अब शहर के लिए नासूर बन चुका है।
खासा कोठी फ्लाईओवर की उपयोगिता और आसपास के यातायात दबाव को देखते हुए अब पूरे क्षेत्र का स्वतंत्र और विस्तृत यातायात अध्ययन कराया जाना चाहिए। जयपुर विकास प्राधिकरण को एमआइ रोड, बनीपार्क, खासा कोठी, स्टेशन रोड, पोलोविक्ट्री और कलेक्ट्रेट की ओर आने-जाने वाले वाहनों की वास्तविक संख्या का आकलन करना चाहिए। इसके साथ ही वाहनों की दिशा, जाम की अवधि और यातायात में बाधा बनने वाले प्रमुख स्थानों की भी जांच होनी चाहिए। वर्ष 2002 में प्रस्तावित मूल अलाइनमेंट और बाद में अपनाए गए अलाइनमेंट की तुलनात्मक समीक्षा भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
जयपुर में यातायात की जरूरतों के अनुरूप योजना नहीं बनाने का एक और उदाहरण बीआरटीएस कॉरिडोर रहा है। पिछले वर्ष जेडीए ने करीब 170 करोड़ रुपए की लागत से बने इस कॉरिडोर को हटाया। जेडीए ने करीब 30 करोड़ रुपए खर्च कर न्यू सांगानेर रोड, अजमेर रोड और सीकर रोड से बीआरटीएस कॉरिडोर हटाया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बीआरटीएस जैसी बड़ी परियोजना को हटाने का फैसला लिया जा सकता है, तो खासा कोठी फ्लाईओवर के मामले में अब तक ठोस निर्णय क्यों नहीं हुआ?
वाहनों की अंतहीन कतारें खासा कोठी पुलिया महज इंजीनियरिंग की चूक नहीं, फैसले की ऐसी नाकामी है, जिसकी सजा जयपुर भुगत रहा है। ऐसे निर्माण विकास नहीं, भ्रष्टाचार और गलत फैसलों के स्मारक हैं। कलक्ट्रेट रोड पर वाहनों की अंतहीन कतारें प्रशासनिक विफलता का सबूत हैं। अलाइनमेंट किसके इशारे पर बदला, किसे फायदा पहुंचा और जनता के पैसे की बर्बादी का हिसाब कौन देगा? इन सवालों के साथ इस बेतुके निर्माण से त्रस्त जनता की आवाज अभियान के रूप में राजस्थान पत्रिका सरकार तक पहुंचाएगा।
क्या आप भी खासा कोठी के इस उल्टे फ्लाईओवर और रोज-रोज के जाम से परेशान हैं? क्या इस ढांचे को तोड़कर सही रूट पर नया फ्लाईओवर बनाना चाहिए? क्या आप खासा कोठी पुलिया के आस-पास से गुजरते हैं। तब आपके दिमाग में क्या आता है? हमें 9057531314 पर वाट्सऐप कर संक्षिप्त में जवाब भेजें।
Updated on:
12 Oct 2026 10:36 am
Published on:
12 Oct 2026 10:36 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
